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Bihar News : श्रीबाबू बने आधुनिक बिहार के निर्माता; दलित को देवघर के मंदिर में बनाया था प्रमुख पुजारी

Mon, 21 Oct 2024 10:14 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, शेखपुरा

सार

Bihar : जब भी कोई बाहर का व्यक्ति पटना से देवघर की ओर जाता है तो एक नज़र माउर गांव के उस खपरैलनुमा मकान की ओर जरूर डालता है। लोग कहते हैं कि श्री बाबू नमक सत्याग्रह आंदोलन से लेकर समाज सुधारक एवं आधुनिक बिहार के निर्माता होने की दूरी तय की थी।
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बिहार केसरी डॉ.श्री कृष्ण सिंह। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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आधुनिक बिहार के निर्माता बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बिहार केसरी डॉ.श्री कृष्ण सिंह का जन्म भले ही शेखपुरा जिले बरबीघा नगर क्षेत्र अंतर्गत माउर गांव में हुआ था, लेकिन आज़ादी के लड़ाई के महान योद्धा, महान चिंतक और प्रखर समाजवादी नेता होने के नाते उनकी पहचान बिहार ही नहीं बल्कि देश के हर कोने तक पहुंच गई थी। एक किसान परिवार में जन्में डॉ.श्री कृष्ण सिंह का खपरैलनुमा घर आज भी उनकी सादगी, ईमानदारी तथा मेहनतकश इंसान होने का याद दिलाता है। हालांकि उनके वंशज आज ऊंचे-ऊंचे आलिशान भवन रह रहे है लेकिन उनकी स्मृतियां आज भी माउर गांव में शेष है। जब भी कोई बाहर का व्यक्ति पटना से देवघर की ओर जाता है तो एक नज़र माउर गांव के उस खपरैलनुमा मकान की ओर जरूर डालता है और याद करता है कि उसी खपरैलनुमा मकान में जन्मे श्री बाबू नमक सत्याग्रह आंदोलन से लेकर समाज सुधारक एवं आधुनिक बिहार के निर्माता होने की दूरी तय की थी। चाहे बरौनी सिंदरी का कारखाना हो या रांची का एचईसी कारखाना सभी श्री कृष्ण सिंह की ही देन कही जाती है। लोग प्यार से उन्हें श्रीबाबू कहकर पुकारते थे। 

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बिहार केसरी का जन्म-गृह।  - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
देवघर मंदिर में महादलित परिवार के व्यक्ति को बनाया था प्रमुख पुजारी
स्थानीय लोग बड़े फक्र से कहते है कि माउर गांव की यह मिट्टी आधुनिक बिहार के निर्माण के लिए एक महामानव पैदा किया था, जिन्होंने समाज सुधार के लिए देवघर के मंदिर में रूढ़िवादी पंडो के वर्चस्व को तोड़ते हुए एक महादलित परिवार के व्यक्ति को प्रमुख पुजारी बनाया था। श्रीबाबू के ज़माने में ही सिंचाई के तमाम बड़ी-बड़ी योजनाएं नहर, डैम्प, चीनी मिल का निर्माण कराया गया था जो उनके निधन के बाद ही धीरे-धीरे ध्वस्त होता चला गया। आज भी नवादा के वारसलीगंज इलाके से निकलने वाली नहर को देखकर आज का बच्चा भी उनके नाम को याद श्रद्धा से नमन करता है। बिहार के लोग राजनीतिक एवं जातिगत भावना से उठकर श्रीबाबू को इसलिए आधुनिक बिहार का निर्माता कहते है क्योंकि उनके ज़माने में जितना औद्योगीकरण औधौकिकरण हुआ था, उसका 10 से 20 प्रतिशत भी बाद के नेताओं ने नहीं करा पाया। उनके ज़माने में जिस रफ़्तार से बिहार में उद्योग लगाए जा रहे थे अगर वह रफ़्तार बरक़रार रहता तो आज बिहार के युवा दिल्ली मुंबई गुजरात की ओर पलायन नहीं करते। उनके ज़माने के खोदे गए नहर से अगर आज पानी आता तो यह के मजदूर किसान बिहार की खेती छोड़कर पंजाब और हरियाणा की ओर नहीं जाते। 
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श्री कृष्ण सिंह। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
जगह-जगह सभा आयोजित कर करते हैं याद 
श्रीबाबू ही वह शख्स थे जिहोने बिहार की धरती को हरा भरा करने के लिए सभी स्टेट हाइवे के दोनों तरफ छायादार वृक्ष लगवाने की योजना लागू करवाएं थे ताकि प्राकृतिक संतुलन के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा हो सकें। कहा जाता है कि बिहार और बंगाल के बंटवारे के दौरान वह चितरंजन का रेल कारखाना छोड़कर छोटा नगरपुर का पठार लेना स्वीकार किया था उस समय उनकी आलोचना हुई थी की बना बनाया कारखाना छोड़कर जंगली इलाका को उन्होंने स्वीकार किया। लेकिन बाद में वही पठार जब माइनिंग शुरू हुआ तब बिहार के राजस्व में चार चाँद लग्न शुरू हो गया तथा लाखों लोगों को रोजगार मिला। उनकी दूरदर्शिता, सरलता, विद्वता, सर्वधर्म सद्भाव के कारण ही आज लोग उन्हें श्रद्धा से याद करते है तथा उनके जन्मदिन पर जगह-जगह सभाएं आयोजित कर उनके बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते है।
(इनपुट: चंदन कुमार)
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