हम पुलिस बोल रहे हैं आपका बेटा रेप केस में फंसा है इसकी पिटाई की जा रही है अगर आप इसे छुड़ाना चाहते हैं तो 50 हजार रुपया अभी भेजिए। अगर आपको ऐसा कोई कॉल आये तो जरा संभलिये। यह कॉल किसी थाने से पुलिस का नहीं बल्कि साइबर फ्रॉड करने वाले एक गिरोह का है। क्यों कि ऐसी एक दो नहीं बल्कि कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें साइबर क्रिमिनल कई लोगों को लाखों का चूना लगा चुके हैं।
ऐसे होती है ठगी
फिलहाल ताजा मामला मुजफ्फरपुर के मीठापुर थाना क्षेत्र का है, जहां एक महिला को 29 मार्च को लगभग 11:30 बजे सुबह में +923042196672, +923288826137 और 9135040737 से कॉल आया जिसमें सबसे पहले यह पूछा गया कि आप पंकज जी की पत्नी बात कर रही हैं? जवाब में महिला ने कहा- हां। फिर कॉल करने वाले ने कहा कि आपका बेटा रेप केस में फंसा है। इसकी पिटाई की जा रही है, अगर आप इसे छुड़ाना चाहते हैं तो 50 हजार रुपया अभी भेजिए। यह सुनकर महिला परेशान हो गई। महिला के अनुसार कॉल करने वाले के नेपथ्य से मम्मी बचा लो-मम्मी बचा लो… की भी आवाज आ रही थी। महिला ने बताया कि कॉल करने वाले ने इस तरह से मुझे अपनी बातों में ले लिया था कि मैं यह भी नहीं समझ पाई कि एक बार मुझे अपने बेटे से भी कॉल कर बात कर लेनी चाहिए।
QR कोड या फिर अन्य मोड से होती है रुपयों की मांग
पीड़िता का कहना है कि मैं परेशान हो गई थी और इसी परेशानी की वजह से आननफानन में मैंने उसके बताये गये नम्बर 9035040737 पर मैनें 24 हजार और फिर 26 हजार रुपये यानी कुल 50 हजार रुपये भेज दिये। पीड़िता ने बताया कि रुपयों की मांग QR कोड या फिर अन्य मोड से मांगी जा रही थी। जब QR कोड से रुपया ट्रांसफर नहीं हुआ तब मोबाइल नंबर पर रुपया भेजना पड़ा।
किसी से बात शेयर नहीं करने के दिए गये थे निर्देश
पीड़िता ने बताया कि वह रुपये मैंने अपने पड़ोसी से लेकर उनके ही अकाउंट से भेजवाये। पीड़िता ने कहा कि कॉल करने वाले ने यह कहा था कि यह बात किसी से न तो शेयर करे और न ही किसी से कुछ पूछे। सच पूछिये तो जिस तरह से अचानक मुझे कॉल कर के जिस तरह का माहौल बनाया गया था उस स्थिति में मैं कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं थी लेकिन रुपया भेजने के बाद जब मेरे एक संबंधी से मेरी बात हुई तब मुझे यह एहसास हुआ कि मैं ठगी जा चुकी हूं।
साइबर थाना में ठगी का मामला कराया दर्ज
मुझे ठगी का एहसास होने के बाद बाद मैं साइबर थाना पहुंची और अपनी पूरी कहानी उनसे बयां की। मेरी बात सुनकर मुझे 1930 पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया। फिर उनके कहे जाने के अनुसार मैंने साइबर थाना में कांड संख्या 32/24 के तहत 31 मार्च को साइबर ठगी का मामला दर्ज कराया।
पुलिस ने अकाउंट फ्रीज कराया
मामला दर्ज होते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने बैंक से बात कर तुरंत उन बैंकों का पता लगाया जिसमें भेजे गये वह रुपये दुसरे अकाउंट में ट्रांसफर किये गये थे। पुलिस ने तुरंत उन रुपयों को फ्रीज कराया। पुलिस का कहना है कि साइबर क्रिमिनल भेजे गए रूपए को अलग एक खाते में भेजा करते थे, जिसे फ्रीज करा दिया गया।
पकड़े गए आरोपी के पास कई बैंक से जुड़ी दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद
साइबर पुलिस की टीम ने पश्चिम चंपारण में छापेमारी कर दो थाना क्षेत्र से तीन आरोपी को गिरफ्तार किया, जिनके पास से 32 ATM कार्ड, एक दर्जन से अधिक बैंक के पासबुक, चेकबुक और बैंक के अन्य दस्तावेज और QR कोड सहित कई आपत्तिजनक सामग्री जब्त किये गये। साथ हीं यह गिरोह POS मशीन का इस्तेमाल कर आधार कार्ड से डिटेल निकलवा कर टारगेट किया करते थे। इस गिरोह के द्वारा अब तक कुल कितने लोगों से ठगी की गई पुलिस अब इसकी जानकारी जुटा रही है।
जानिए कौन हैं साइबर अपराधी और उनके पास से क्या क्या हुआ बरामद
विशेष टीम ने पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया और बैरिया थाना क्षेत्र में करवाई करते हुए तीन शातिर को पकड़ा है, जिसमें शाहिद अफरीदी, अजहरुद्दीन अंसारी और एहसान आलम शामिल हैं। इनके पास से 1.33 लाख रुपये, एक लैपटॉप, विभिन्न बैंक के कुल 7 पासबुक, 10 अलग-अलग बैंक के चेकबुक, NSDL बैंक के ATM कार्ड के 5 किट, 32 विभिन्न बैंक के एटीएम कार्ड, एक ATM कार्ड स्वाइप मशीन, एक POS मशीन, एक QR कोड स्कैनर, 5 सिम कार्ड, 4 मोबाइल, 9 आधार कार्ड, 2 पैन कार्ड, एक पासपोर्ट और 10 सऊदी अरब के रियाल का नोट और मलेशिया देश की रिंगित नोट शामिल हैं।
इंटरनेशनल कनेक्शन भी हैं
पूरे मामले में सिटी एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि इस गिरोह के काम करने का पैटर्न बेहद ही अलग है। पुलिस के नाम पर आम आदमी में एक डर होता है और किसी भी तरह का थ्रेट करने में टारगेट फंस जाया करते थे। इनके पास से विदेश से जुड़े हुए होने की जानकारी के साथ कई सिम कार्ड मिले हैं और साथ ही तीन देश की करेंसी नोट भी बरामद हुए हैं। इस दौरान 1.33 लाख नगदी, बैंक टू बैंक टेंडर और फिर मास्टर ट्रांसफर इसके प्रमाण हैं। बड़ी संख्या में इतनी बैंक के खाते और इससे जुड़े ATM POS QR कोड NDL ATM ओपन कीट और अन्य सामग्री अपने आप में साइबर ठगी करने के कई प्रमाण दे रहा है। पुलिस का अनुसंधान अभी जारी है और अभी और भी खुलासे होंगे।