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Bihar News: गरीबों के मसीहा कहे जाने वाले डॉक्टर अरुण तिवारी नहीं रहे, 37 साल में मात्र 38 रुपये बढ़ाई फीस

Sun, 15 Dec 2024 04:59 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

पटना के महेंद्रू में डॉक्टर तिवारी अपना क्लिनिक चलाते थे। उस समय वह मात्र 12 रुपये में मरीजों का इलाज करते थे। सबसे कम, सस्ती दवा लिखने और सटीक इलाज करने के कारण वह जल्दी ही लोकप्रिय हो गए।
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डॉक्टर अरुण तिवारी की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार के जाने माने डॉक्टर अरुण तिवारी का निधन हो हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। पटना में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने से चिकित्सा क्षेत्र में शोक की लहर है। बिहार में सबसे कम कंसल्टेशन फीस लेने के कारण उनके मरीजों ने उन्हें गरीबों का मसीहा कहा। सुबह छह बजे से पहले ही राज्य के दूर-दराज इलाकों समेत आसपास के राज्यों के मरीजों का जमावड़ा महेन्द्रू के रानी घाट स्थित एक क्लिनिक पर लगने लगता था। सुबह से शाम तक डॉक्टर तिवारी तीन शिफ्ट में करीब 300 मरीजों को प्रतिदिन देखते थे। उनके जाने के बाद उनके आवास पर क्लिनिक पर उनके चाहने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी।  
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डॉ.अरुण कुमार तिवारी का जन्म पटना में 1946 में हुआ था। पिता अंबिका प्रसाद तिवारी का प्रिटिंग प्रेस था, जबकि माता हेमलता गृहिणी थीं। पढ़ाई-लिखाई सेंट जेवियर और पटना मेडिकल कॉलेज से हुई थी। एमबीबीएस की पढ़ाई साल 1963 से 1969 तक हुई। इसमें बाद एमडी किया। 1975 में पहली नौकरी मुंगेर में लगी। इसके बाद पीएससीएच में रेजिडेंट फिजिशियन बने। इसके बाद डॉ तिवारी मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। 1987 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी। पटना के महेंद्रू में अपना क्लिनिक खोला। उस समय वह मात्र 12 रुपये में मरीजों का इलाज करते थे। सबसे कम, सस्ती दवा लिखने और सटीक इलाज करने के कारण वह जल्दी ही लोकप्रिय हो गए। उनका तर्क था कि बाजार में कई दवाएं एक रुपए में भी मिलती हैं और दस रुपए में भी। आखिर हम किसी मरीज को दस रुपए की दवा क्यों लिखें, जबकि काम दोनों एक ही तरह करता है। 

मधुबनी जिला के रहने वाले दयाशंकर मिश्रा कहते हैं कि वह डॉक्टर नहीं भगवान थे। उनके जाने से स्वास्थ्य क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। वह न अधिक दवा लिखते और न ही ज्यादा जांच। मरीज से बात करते करते उनकी बीमारी जान लेते थे। अहले सुबह से उनके क्लिनिक पर भीड़ लगी रहती थी। फीस कम होने के सवाल पर कहते थे कि डॉक्टर और मरीज का रिश्ता विश्वास का होता है। ऐसे में अगर वह ज्यादा फीस लेंगे तो भी लोग आएंगे, लेकिन क्या जिसके पास पैसा नहीं है वह इलाज नहीं कराए। वहीं पटना के कंकड़बाग निवासी ज्योति वर्मा ने कहा कि आज के दौर में डॉक्टर जहां मोटी राशि केवल फीस के लिए वसूलते हैं और महंगी-महंगी दवाइयां लिखते, ऐसे में डॉक्टर तिवारी भगवान से कम नहीं थे। अमीर और गरीब के बीच वह फर्क नहीं करते थे। उन्होंने लोगों की सेवा में अपना पूरा जीवन बीता दिया। उनके जाने से समाज को क्षति हुई है।  
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