गांव में उमड़ी लोगों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा नेता प्रभात झा नहीं रहे।
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बचपन में रिश्तेदार के साथ ग्वालियर आए थे
प्रभात झा बचपन में अपने एक रिश्तेदार के साथ ग्वालियर के जेसी मिल इलाके में आए। वहां आते ही वह भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों के संपर्क में आ गए। जल्द ही वह जेसी मिल इलाके के नेता भाऊ साहब पोटनिस के करीबी बन गए और उनके साथ ही रहते थे। उनका ठिकाना भाजपा कार्यालय हुआ करता था। प्रभात झा ने ग्वालियर में ही पीजीवी कॉलेज से बीएससी और माधव कॉलेज से राजनीति शास्त्र में पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने एलएलबी कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। 1986 में बिहार में उनकी शादी रंजना झा से हुई। शादी के बाद वह किराए के मकान में रहने लगे और स्वदेश अखबार में पत्रकारिता करने लगे। उस समय मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और भाजपा सत्ता के लिए संघर्ष कर रही थी। कुशाभाऊ ठाकरे मध्य प्रदेश में कमान संभाले हुए थे और उन्हें मीडिया में जगह नहीं मिल रही थी। इसके बाद उन्होंने प्रदेश में मीडिया सेंटर स्थापित करने की सलाह दी। इस प्रकार प्रदेश में भाजपा ने मीडिया सेंटर स्थापित किए और भोपाल के मीडिया सेंटर प्रभारी की जिम्मेदारी प्रभात झा को दी गई। झा 1993 से 2002 तक मीडिया प्रभारी और प्रवक्ता रहे।
इस वजह से प्रभात झा को दिल्ली भेजा गया
वरिष्ठ पत्रकार देवश्री माली बताते हैं कि जब उमा भारती को दिल्ली से मध्य प्रदेश भेजा गया था, तो उनके कहने पर ही प्रभात झा को भोपाल से दिल्ली भेज दिया गया था। इसका कारण प्रभात झा की मीडिया और नेताओं के साथ अच्छी पकड़ बताई जाती है। 2003 से 2005 तक झा भाजपा के साहित्य एवं प्रकाशन के अखिल भारतीय प्रभारी रहे। इसके बाद 2005 से कमल संदेश के संपादक रहे।
दिल्ली में भी अपने काम से बनाई पहचान
प्रभात झा को दिल्ली में पार्टी ने प्रकाशन का काम सौंपा। उन्होंने इस मौके को अवसर में बदला। राजनाथ सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर उन्हें संगठन में 2007 में राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। इसके एक साल बाद ही अप्रैल 2008 में उन्हें राज्यसभा भेज दिया गया। अगस्त 2009 से संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के सदस्य बने। दोबारा राज्यसभा के लिए निर्वाचित नहीं होने के बाद प्रभात झा और मजबूत होकर मध्य प्रदेश लौटे। पार्टी ने उन्हें 8 मई 2010 को मध्य प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। वह दिसंबर 2012 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। इसके बाद 2015 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।