राजद प्रवक्ता ने कहा कि आज दरभंगा दौरे के बाद मुख्यमंत्री जी द्वारा बाढ़ पीड़ितों को सात-सात हजार रुपए देने की घोषणा की गई है। यह तो 'ऊंट के मुंह में जीरा' वाली बात हो गई। जिस परिवार का सबकुछ बर्बाद हो गया है उन्हें इतनी कम राशि से क्या होगा।
बिहार में बाढ़ पर सियासत जारी है। अब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने सीएम नीतीश कुमार को नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार को प्रो-एक्टिव होना चाहिए। और, बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। चुनाव के वक्त विकास का हवाला देकर डबल इंजन वालों ने वोट तो ले लिया लेकिन अब क्या हुआ। बाढ़ से हाहाकार मचा है। लोगों के पास छत नहीं है। खाने के लिए भोजन ने वह तरस रहे हैं। सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए।
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वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने पर अखिलेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री किसलिए होता है? यह मुख्यमंत्री का कर्तव्य है, जिससे वह बच नहीं सकते। अगर वह सीएम नीतीश कुमार आपदा में काम नहीं करते हैं फिर वह किस बात का मुख्यमंत्री है?
भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है
इधर, राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष द्वारा बाढ़ पीड़ितों की उपेक्षा का सवाल उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री जी को अपनी जिम्मेदारी का ख्याल आया और दो दिन हवाई सर्वेक्षण कर औपचारिकता पूरी कर दी। पर राज्य सरकार एक भी मंत्री कभी भी बाढ़ पीड़ितों के बीच कहीं नजर नहीं आए। पटना बैठकर केवल राजनीतिक बयानबाजी करने तक हीं सिमटे रहे। बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच न सही ढंग से राहत सामग्री पहुंच रही है और न राहत-बचाव का सही ढंग से मोनिटरिंग हो रही है। सारी व्यवस्था स्थानीय निम्नवर्गीय कर्मचारियों पर छोड़ दिया गया है और उन्हें भी सीमित संसाधन हीं उपलब्ध कराए गए हैं जिसकी वजह से उन कर्मचारियों को बाढ़ पीड़ितों के बीच भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
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'ऊंट के मुंह में जीरा' वाली बात हो गई
राजद प्रवक्ता ने कहा कि आज दरभंगा दौरे के बाद मुख्यमंत्री जी द्वारा बाढ़ पीड़ितों को 7-7 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है। यह तो 'ऊंट के मुंह में जीरा' वाली बात हो गई। जिस परिवार का सबकुछ बर्बाद हो गया है उन्हें इतनी कम राशि से क्या होगा। उन्होंने कहा कि गगन ने कहा कि ऐसे बाढ़ प्रभावित परिवारों की संख्या तीस लाख से ज्यादा है पर सरकार के आंकड़े के अनुसार हीं बाढ़ प्रभावित परिवारों की संख्या 16,50,000 है। और सरकार द्वारा मात्र 48,000 परिवारों को हीं सात-सात हजार रुपए देने की घोषणा की गई है। फिर बाकी 16,02000 परिवारों को इस लाभ से क्यों वंचित किया जा रहा है।