आरोपी को कोर्ट ले जाती पुलिस।
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कब और कैसे हुई थी हत्या
शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा के कद्दावर नेता और बिहार प्रदेश के पूर्व उपाध्यक्ष विश्वेश्वर ओझा की हत्या 12 फरवरी 2016 को देर शाम शाहपुर थाना क्षेत्र के सोनवर्षा बाजार में उस वक्त हत्या कर दी गई थी.जब वह अपनी फोर व्हीलर गाड़ी से एक शादी समारोह में शामिल होकर अपने घर लौट रहे थे। तभी वहां पहले से घात लगाये दर्जनभर की संख्या में हथियारबंद बदमाशों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग करनी शुरू कर दी। अपराधियों ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया, जिसमें उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इस हत्या के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल कायम हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने इस कांड में मृतक बीजेपी नेता के परिजनों के द्वारा शाहपुर थाने में कांड संख्या 48/16 में दर्ज कराई गई।
कोर्ट के अंदर जाते आरोपी।
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जानिए क्या हुआ इस कहानी में
प्राथमिकी में ब्रजेश मिश्रा और उनके भाई हरेश मिश्रा सहित करीब 13 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया था। कोर्ट ने हाई प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री में 402/18 और 390/16 दो सेशन ट्रायल के तहत मुकद्दमे में सुनवाई करते हुए मुख्य आरोपी बृजेश मिश्रा को 402/18 सेशन ट्रायल में आईपीसी की धारा 302,307 और 27 आर्म्स एक्ट मामले में दोषी पाया है.जबकि उनके भाई हरेश मिश्रा को 390/16 सेशन ट्रायल में आईपीसी की धारा 302, 307 और 27 आर्म्स एक्ट में दोषी करार दिया है। वही अन्य पांच अभियुक्त उमाकांत मिश्रा, टुन्नी मिश्रा, बसंत मिश्रा, पप्पू सिंह और हरेंद्र सिंह को भाजपा नेता विशेश्वर ओझा की हत्याकांड में साजिश के तहत शामिल होने के मामले में आईपीसी की धारा 307 और 27 आर्म्स एक्ट में दोषी माना है.इधर इस कांड के प्राथमिक की में दर्ज 6 आरोपी कुंदन यादव,संतोष चौधरी,विनोद ठाकुर,मदन ठाकुर भृगुनाथ मिश्रा और बबलू मिश्रा को साक्ष्य के अभाव में इस केस से बरी कर दिया है। ज्ञात हो कि भाजपा नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड में आज कोर्ट के द्वारा इसमें शामिल आरोपियों को दोषी करार देने के बाद मृतक के परिजनों में खुशी का माहौल है। इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में भी कोर्ट के फैसले की चर्चा काफी तेजी से हो रही है।