बिहार पुलिस लापरवाही की रोज नई कहानी गढ़ रही है। ऐसी ही एक कहानी के कारण गया शहर गरम है। हंगामा हो रहा है। डीजीपी आलोक राज का सख्त निर्देश सिर्फ बयान बनकर रह गया है। नतीजा है कि अब पुलिस एक ऐसी लाश ढूंढ़ रही है, जो पोस्टमार्टम के बाद उसके रिकॉर्ड से ही गायब हो गई- सशरीर। पुलिस ने सड़क हादसे का शिकार स्कूटी और उसमें मरने वाले युवक का मोबाइल हाथ में रहते हुए भी परिजनों तक पहुंचने की जगह पोस्टमार्टम के बाद शव को एक होमगार्ड के हवाले कर दिया। होमगार्ड ने भी जिम्मेदारी लिए बगैर पोस्टमार्टम रूम में दिखे एक युवक के हवाले कर दिया। अब जब परिजनों को अपने जवान बेटे की मौत का पता चला है और हंगामा बढ़ा तो पुलिस पता लगा रही कि लाश का हुआ क्या?
इस संबंध में जिले के टिकारी अनुमंडल के डीएसपी सुशील कुमार चंचल ने बताया कि पीड़ित पक्ष से बातचीत हुई है। उन्होंने अपनी डिमांड रखी है। उन्हें कहा गया है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है व मृतक के बॉडी की शिनाख्त क्यों नहीं हो पाई, मृतक की बॉडी का आखिर क्या हुआ। इन तमाम चीजों की जांच की जाएगी। इस मामले में जिस भी स्तर से लापरवाही बरती गई है। उनके खिलाफ तत्काल एक्शन लिया जा रहा है।
जानें क्या है पूरा मामला
गया शहर के करीमगंज मुहल्ले के रहने वाला शहाबुद्दीन 27 अक्टूबर को अपने पिता की स्कूटी लेकर घर से निकला था। 27 तारीख को ही जिले के परैया थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई थी। लेकिन उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी थी। अचरज की बात है कि शहाबुद्दीन की स्कूटी पर रजिस्ट्रेशन नम्बर भी थे और घटना स्थल से उसका मोबाइल भी बरामद हुआ था। इसके बावजूद पुलिस उसकी शिनाख्त नहीं कर सकी। परैया थाना की पुलिस ने शहाबुद्दीन के शव और उसकी स्कूटी को कब्जे में ले लिया था। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पोस्टमार्टम के बाद शव को 72 घण्टे के लिए शिनाख्त के उद्देश्य से सुरक्षित रख दिया था। इस बीच मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी।
पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी
पुलिस के इस संवेदनशील रवैया से नाराज हो कर पीड़ित ने बीते 10 अक्टूबर को एसएसपी से मिलने गए पर किसी वजह से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद रविवार की शाम उन्होंने कैंडिल मार्च का मन बनाया तो सरकारी अमला हरकत में आ गया। पुलिस मृतक के घर वालों को आश्वासन देकर बाहर निकली तो मुहल्ले के लोगों ने उन्हें घेर लिया। पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस संबंध में मृतक के पिता गुलाम हैदर ने बताया कि पुलिस ने उनसे दो दिनों की मोहल्लत मांगी है। अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि हमें न्याय मिलेगा। अब हमारे पास भरोसा करने के अलावा और कोई रास्ता ही नहीं है।