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Bihar: पोस्टमार्टम के बाद शव गायब! हादसे के बाद स्कूटी-मोबाइल रहते परिजन को नहीं ढूंढा, अब मृत शरीर की खोज

Mon, 14 Oct 2024 07:33 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया

सार

Bihar Police : डीजीपी आलोक राज का सख्त निर्देश पुलिस की लापरवाही नहीं रोक पा रहा है। अभी गया ऐसी ही लापरवाही से गरम है। हादसे के बाद मृतक का स्कूटी-मोबाइल रहते परिजनों को सूचना नहीं दी गई। पोस्टमार्टम के बाद लाश कहां गई, रिकॉर्ड में नहीं है।
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लोगों ने जताया आक्रोश। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार पुलिस लापरवाही की रोज नई कहानी गढ़ रही है। ऐसी ही एक कहानी के कारण गया शहर गरम है। हंगामा हो रहा है। डीजीपी आलोक राज का सख्त निर्देश सिर्फ बयान बनकर रह गया है। नतीजा है कि अब पुलिस एक ऐसी लाश ढूंढ़ रही है, जो पोस्टमार्टम के बाद उसके रिकॉर्ड से ही गायब हो गई- सशरीर। पुलिस ने सड़क हादसे का शिकार स्कूटी और उसमें मरने वाले युवक का मोबाइल हाथ में रहते हुए भी परिजनों तक पहुंचने की जगह पोस्टमार्टम के बाद शव को एक होमगार्ड के हवाले कर दिया। होमगार्ड ने भी जिम्मेदारी लिए बगैर पोस्टमार्टम रूम में दिखे एक युवक के हवाले कर दिया। अब जब परिजनों को अपने जवान बेटे की मौत का पता चला है और हंगामा बढ़ा तो पुलिस पता लगा रही कि लाश का हुआ क्या?

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मिली जानकारी के मुताबिक जिले के परैया गया मार्ग में 27 सितंबर को सड़क दुर्घटना में हुए मौत के बाद परिजनों को मृतक के युवक की बॉडी की नही मिलने का मसला अब जिले में गरमाने लगा है। वंही गया पुलिस के संवेदनहीन रवैये से पीड़ित परिवार का सब्र की बांध टूटी तो मृतक के परिजनों व अन्य लोगो ने सड़कों पर उतर कर जिला पुलिस के विरोध में कैंडिल मार्च का मन बना लिया। जिसके बाद पीड़ित परिवार और उनके मुहल्ले के लोग ने कैंडिल मार्च की तैयारी ही कर रहे थे कि जिसकी भनक जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को लग गई और आनन फानन में सदर अनुमंडल पदाधिकारी किसलय श्रीवास्तव व टाउन एएसपी पीएन शाहू, टिकारी एसडीपीओ सुशील कुमार चंचल सहित अपने दलबल के साथ पीड़ित के घर करीमगंज पहुँच गए और पीड़ित के घर पर आधे घण्टे से अधिक देर तक एक कमरे में पीड़ित परिवार और मुहल्ले के लोगों से बातचीत हुई व लोगों ने पुलिस की लापरवाही को लेकर लोगों ने अपनी नाराजगी जताई। लेकिन पीड़ित के परिजनों से मिलने पहुँचे अधिकारियों ने उन्हें अपने विश्वास में लिया और दो दिनों की समय की मांग किया है वंही उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर मृतक की बॉडी का पता किया जाएगा और साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

इस संबंध में जिले के टिकारी अनुमंडल के डीएसपी सुशील कुमार चंचल ने बताया कि पीड़ित पक्ष से बातचीत हुई है। उन्होंने अपनी डिमांड रखी है। उन्हें कहा गया है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है व मृतक के बॉडी की शिनाख्त क्यों नहीं हो पाई, मृतक की बॉडी का आखिर क्या हुआ। इन तमाम चीजों की जांच की जाएगी। इस मामले में जिस भी स्तर से लापरवाही बरती गई है। उनके खिलाफ तत्काल एक्शन लिया जा रहा है।

 

जानें क्या है पूरा मामला
गया शहर के करीमगंज मुहल्ले के रहने वाला शहाबुद्दीन 27 अक्टूबर को अपने पिता की स्कूटी लेकर घर से निकला था। 27 तारीख को ही जिले के परैया थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई थी। लेकिन उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी थी। अचरज की बात है कि शहाबुद्दीन की स्कूटी पर रजिस्ट्रेशन नम्बर भी थे और घटना स्थल से उसका मोबाइल भी बरामद हुआ था। इसके बावजूद पुलिस उसकी शिनाख्त नहीं कर सकी। परैया थाना की पुलिस ने शहाबुद्दीन के शव और उसकी स्कूटी को कब्जे में ले लिया था। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पोस्टमार्टम के बाद शव को 72 घण्टे के लिए शिनाख्त के उद्देश्य से सुरक्षित रख दिया था। इस बीच मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी।

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इधर, मृतक के परिजन शहाबुद्दीन को ढूंढ तो रहे थे पर उसकी गुमशुदगी की पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी। बीते 8 अक्टूबर को शहाबुदीन के पिता गुलाम हैदर को अपने किसी परिचित से पता चला कि उनकी स्कूटी परैया थाने में पड़ी है। इस पर जब थाने से फोन पर सम्पर्क किया गया तो बताया गया कि स्कूटी सवार युवक की सड़क हादसे में डेथ हो चुकी है। उसकी डेड बॉडी डिस्पोजल करा दिया गया है। यह बात सुनते ही गुलाम हैदर व उनके घर वालों के होश फाख्ता हो गए। गुलाम हैदर ने परैया थाने में जाकर सम्पर्क किया। थानेदार मुकेश कुमार से जानना चाहा कि आखिरकर उनके बेटे को कहां और कब डिस्पोजल किया गया। इस बात की वे जानकारी नहीं दे सके। बताया कि शव काफी दिनों तक लावारिस पड़ा था तो उसका अंतिम संस्कार करना पड़ा। इस पर उन्होंने शव के अंतिम संस्कार के बाबत प्रमाण पत्र मांगे पर वह भी पीड़ित को थानेदार नहीं दे सके। इसके बाद गुलाम हैदर ने उस चौकीदार से सम्पर्क किया जो शव को डिस्पोजल करने गया था। चौकीदार ने उन्हें बताया कि डेड बॉडी को अंतिम संस्कार के लिए उसने गया के पोस्टमार्टम हाउस परिसर में ही किसी मनोज मांझी नाम के शख्स को सौंप दिया था। उसने उस शव को दफनाया या दाह संस्कार किया। यह वही बताएगा। शव को ठिकाने लगाने के लिए मनोज को उसने 2700 रुपए भी दिए थे। पीड़ित पक्ष ने परैया थाने से मनोज मांझी से पूछताछ कर शव की जानकारी तलब करने की मांग की गई पर थाना पुलिस की ओर से अब तक कोई जानकारी उन्हें नहीं दी गई। 


पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी
पुलिस के इस संवेदनशील रवैया से नाराज हो कर पीड़ित ने बीते 10 अक्टूबर को एसएसपी से मिलने गए पर किसी वजह से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद रविवार की शाम उन्होंने कैंडिल मार्च का मन बनाया तो सरकारी अमला हरकत में आ गया। पुलिस मृतक के घर वालों को आश्वासन देकर बाहर निकली तो मुहल्ले के लोगों ने उन्हें घेर लिया। पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस संबंध में मृतक के पिता गुलाम हैदर ने बताया कि पुलिस ने उनसे दो दिनों की मोहल्लत मांगी है। अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि हमें न्याय मिलेगा। अब हमारे पास भरोसा करने के अलावा और कोई रास्ता ही नहीं है।

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