पटना हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक आम लोगों ने लड़ाई लड़ी, लेकिन बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना का काम पूरा करते हुए रिपोर्ट भी जारी की और उस आधार पर आरक्षण भी बढ़ा दिया। लेकिन, आम लोगों के साथ क्या यह आरक्षण खास लोगों पर लागू हुआ? चूंकि जातिगत जनगणना का प्रस्ताव 2020 के जनादेश पर बनी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने पास किया था और इसे पूरा कराते समय महागठबंधन की सरकार थी तो दोनों ही राजनीतिक धुव्रों में से कोई विपक्ष में था, नहीं कहा जा सकता। रविवार सुबह 11 बजे तक जो सरकार थी, उसमें भी जातिगत जनगणना के आधार पर दिया आरक्षण लागू नहीं हो रहा था। रविवार शाम बनी सरकार में भी यह नहीं लागू हुआ, जानें कैसे?
नौ मंत्री अभी बने हैं, उसकी हकीकत जानें
मुख्यमंत्री समेत नई सरकार में नौ मंत्री बनाए गए हैं। जातीय जनगणना में सबसे ज्यादा 14.26 फीसदी आबादी यादवों की दिखाई गई, लेकिन मौजूदा सरकार में केवल एक मंत्री इस जाति के हैं- जदयू कोटे के बिजेंद्र प्रसाद यादव। कोइरी जाति से भाजपा कोटे के सम्राट चौधरी उप मुख्यमंत्री की भूमिका में हैं। कोइरी के लिए राजनीतिक भाषा में 'कुश' शब्द प्रचलित है, यानी कुशवाहा। जातीय जनगणना की रिपोर्ट में कोइरी की आबादी 4.21 फीसदी बताई गई थी। राजपूतों की आबादी 3.45 फीसदी बताई गई और नई सरकार में इसके एक मंत्री सुमित कुमार सिंह हैं, जो निर्दलीय को साथ रखने की नीयत से रखे गए हैं। रिपोर्ट में 3.08 प्रतिशत आबादी मुसहर की है और मौजूदा सरकार में बतौर घटक दोबारा एंट्री लेने वाले हिन्दुस्तानी आवामी मोर्चा- सेक्युलर के संतोष कुमार सुमन उर्फ संतोष मांझी इसी जाति के हैं। वह जून में विपक्षी दलों की बैठक से पहले तत्कालीन महागठबंधन सरकार छोड़ गए थे। मंत्रिमंडल में शामिल सदस्यों की जातिगत आबादी के हिसाब से इसके बाद भूमिहार का नंबर आता है। भूमिहारों को बिहार में 2.89 प्रतिशत बताया गया था। मंत्रमंडल में इस जाति के भाजपाई डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और जदयू कोटे के विजय कुमार चौधरी हैं। इसके बाद 2.87 प्रतिशत आबादी वाली कुर्मी जाति का प्रतिनिधित्व स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मंत्री श्रवण कुमार कर रहे हैं। मतलब, इस जाति से सीएम और एक मंत्री हैं। दोनों जदयू से हैं। मंत्रिमंडल सदस्यों में भाजपाई डॉ. प्रेम कुमार चंद्रवंशी कहार जातीय समूह से आते हैं। यह अति पिछड़ी जाति है। जातीय जनगणना में इस जाति की आबादी 1.64 बताई गई थी।
जदयू जोड़ेगा रविदास-दुसाध, भाजपा का फोकस क्या
बिहार की पिछली सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार तो कांग्रेस के नंबर वन नेता राहुल गांधी भी करते रहे, लेकिन अब वह सरकार ही खत्म हो चुकी है। नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में देरी नहीं होगी। बजट सत्र के पहले इसे पूरा कर लिया जाएगा, मतलब इस हफ्ते के अंत तक भी यह संभव है। ऐसे में जदयू का फोकस रविदास-दुसाध जैसी जातियों के मंत्रियों पर होगा, क्योंकि जातीय जनगणना रिपोर्ट के हिसाब से उसके पास अनुभवी मंत्रियों में इनकी संख्या है। दूसरी तरफ भाजपा अपने वोट बैंक और जातीय समीकरण के हिसाब से ब्राह्मण-बनिया के अलावा यादव मंत्री भी लाएगी।