"मेरी गलती थी कि इस आदमी को मैंने मुख्यमंत्री बना दिया। कोई सेंस नहीं है। ऐसे ही बोलते रहता है। इसको मुख्यमंत्री बनाना मेरी मूर्खता थी।" मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गुरुवार को बिहार विधानसभा में पूर्व सीएम जीतन राम मांझी को लेकर की गई इस टिप्पणी पर बिहार में बवाल मचा हुआ है। भाजपा ने तो इसे दलितों का अपमान बताया ही, असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान ने त्वरित और तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पहले जैसे नहीं रहे। लगता है कि उनकी मानसिक स्थिति कुछ गड़बड़ है। इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इस तरह दलित का अपमान नहीं करना चाहिए। सवर्ण या दबंग पूर्व सीएम को ऐसा नहीं कह सकते थे। यह दलितों का अपमान है।
मुख्यमंत्री की हिम्मत नहीं होती अगर...
एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि जीतनराम मांझी चूंकि एक दलित नेता हैं इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें इस तरह से अपमानित किया। मैं समझता हूं कि अगर आज जीतनराम मांझी दलित न होकर किसी मजबूत जाति के होते या फिर सामंतवादी बिरादरी के होते तो मुख्यमंत्री ऐसा साहस करने की हिम्मत नहीं करते।
बिगड़ गया है मुख्यमंत्री का मानसिक संतुलन
एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी दोनों हमारे सम्मानित नेता हैं। मुख्यमंत्री जी सदन के नेता हैं और जीतन राम मांझी जी सदन के नेता रह चुके हैं। इन दोनों के बीच में क्लासिकल बातें होनी चाहिए, लेकिन जिस तरह से मुख्यमंत्री जी ने जीतनराम मांझी जी को कहा है उस तरह देहात में भी कोई जेठानी नहीं लड़ती होगी, वैसा व्यवहार मुख्यमंत्री जी ने जीतनराम मांझी के साथ किया है। मैं मानता हूं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ऐसा व्यवहार पहले नहीं था। वह तो बहुत सहिष्णुता और शालीनता के साथ बात करते थे। यह सब देखकर ऐसा लगता है कि अब उनका मानसिक संतुलन कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर हुआ है।
पीके और उपेंद्र कुशवाहा ने भी कहा था मेमोरी लॉस
प्रशांत किशोर और उनके पुराने साथी उपेंद्र कुशवाहा सहित अन्य कई लोगों ने भी इस बात को कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है। यह बातों को भूल जाते हैं। जाना कहीं होता है और चले कहीं और जाते हैं। कभी 9:00 बजे चल देते हैं, कहीं बार-बार चले जाते हैं। ऐसा लगता है कि कहना कुछ और चाहते हैं लेकिन कह कुछ और देते हैं। अब हम क्या कह सकते हैं वह हमसे बड़े हैं, उनका सम्मान जरूरी है। मीर एक कवि हैं जिन्होंने एक बड़ी अच्छी पंक्ति का ही है इनके जैसे लोगों के लिए-
होशो हवास अक्ल ए खिरत सब जा चुकी है ऐ मीर
एक हम ही रह गए हैं, सामान जा चुके हैं।