फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar : केके पाठक के शिक्षा विभाग ने पटना डीएम को धमकाया- बात नहीं मान रहे, पटना हाईकोर्ट में क्या कीजिएगा

Tue, 23 Jan 2024 08:06 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar News : राजद कोटे के मंत्री प्रो. चंद्रशेखर को नीतीश सरकार के शिक्षा विभाग से हटवाने में कामयाब रहे अपर मुख्य सचिव केके पाठक अब पटना के डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह के पीछे पड़ गए हैं। उन्हें पटना हाईकोर्ट में घसीटने की बाकायदा लिखित धमकी दी गई है।
विज्ञापन
पटना डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह और केके पाठक आमने-सामने। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

करीब 15 साल पहले पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल से ब्लड बैंक हटाने के लिए जारी चिट्ठी में डॉक्टरों के लिए केके पाठक ने 'मूर्ख' शब्द लिखा था तो पटना हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई थी। उसके पहले भी वह ऐसी खबरों के लिए चर्चा में रहते थे। अब मौजूदा नीतीश कुमार सरकार में भी वह चर्चा में हैं। करीब एक साल पहले उन्होंने सचिवालय परिसर में बैठक के दौरान बिहारी अफसरों के लिए अपशब्द कहे थे, जो वायरल भी हुआ। वायरल करने वाले खोजकर दंडित हुए, मगर पाठक पाक-साफ रहे। फिर, शिक्षा विभाग आए। यहां बड़बोले शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर से विवाद हुआ तो पिछले दिनों उन्हें हटवा कर ही माने। इसी दरम्यान राष्ट्रीय स्तर के डॉ. अजय कुमार से उनकी गालीबाजी का ऑडियो वायरल हुआ। और अब, एक पत्र हर तरफ वायरल है। पत्र सही है। यह वस्तुत: पत्र नहीं, धमकी है पटना के जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह को। बिंदुवार धमकी में उन्हें बताया गया है कि शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव की आदेश की नाफरमानी कर उन्हें पटना हाईकोर्ट में क्या-क्या जवाब देना पड़ेगा।

विज्ञापन


जानिए कौन-कौन से होंगें सवाल 
पहला सवाल : शीतलहर में केवल बच्चों का स्वास्थ्य और जीवन ही खतरे में पड़ता है और वृद्धि एवं बीमार लोगों का जीवन खतरे में नहीं पड़ता है, ऐसा किस आधार पर आपके द्वारा माना गया है।

दूसरा सवाल : विद्यालय के अलावे व्यापारियों प्रतिष्ठानों, दुकानों, सिनेमाघरों, मॉल, पार्क इत्यादि को बंद करना तो दूर उनके समय अवधि में भी कोई बदलाव आपके द्वारा नहीं किया गया है।
विज्ञापन


तीसरा सवाल : धारा 144 लगाने के बावजूद जगह-जगह पर बच्चे आते-जाते दिख जाते हैं। अतः इतने व्यापक पैमाने पर धारा 144 को enforce करने के लिए आपके द्वारा क्या तैयारी की गई थी, क्योंकि यह नहीं माना जा सकता है कि बच्चे केवल विद्यालय जाने पर बीमार होंगे एवं अन्य स्थानों पर (जैसे बाजार, मॉल, पार्क इत्यादि) जाने पर बीमार नहीं होंगे। अतः उदाहरण के तौर पर यह पूछा जा सकता है कि आपने अपने धारा 144 के आदेश में यह उल्लेख क्यों नहीं किया कि 12 वर्ष से कम आयु का कोई बच्चा घर से ही बाहर नहीं निकलेगा। संभवतः वैसा आदेश बेहतर होता क्योंकि केवल विद्यालय बंद कर देने से क्या बच्चे सुरक्षित माने जा सकते हैं?

चौथा सवाल : यह भी पूछा जा सकता है कि मिशन दक्ष एवं बोर्ड परीक्षा हेतु विशेष कक्षाओं के संचालक को किस आधार पर आपने मुक्त किया। आपके उपरोक्त आदेशों में आपसी विरोधाभास है, क्योंकि एक तरफ अपने कक्षा 8 तक ही शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगाई है किंतु मिशन दक्ष को जारी रखा है, जबकि मिशन दक्ष भी कक्षा तीन से कक्षा 8 तक के बच्चों पर लागू होता है।

पांचवां सवाल : यह भी स्पष्ट करना चाहेंगे कि इस तरह का आदेश जो आपने दिनांक 8 जनवरी से कई चरणों में निकाला है, कि पूर्व आपने किन सूचनाओं को प्राप्त कर यह तय किया कि शीतलहर के कारण विद्यालय बंद किया जाना चाहिए। मौसम विभाग अथवा अन्य स्रोतों से क्या जानकारी ली गई? कितने आंकड़ों एवं टेंपरेचर चार्ट को प्राप्त कर अध्ययन किया गया? दिनांक 8 जनवरी के बाद के इन आंकड़ों की किस प्रकार समीक्षा की गई, जिसके आधार पर अपने इस आदेश को निकाला।
विज्ञापन

 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें