राजस्थान में भगवा धारण कर राजपूतों की रैली में शामिल हो रहे थे अभी आनंद मोहन।
- फोटो : अमर उजाला
तो क्या भाजपा में कुछ संभावना अब भी है
भारतीय जनता पार्टी में संभावना देखने की बात है तो आनंद मोहन के छोटे बेटे की अंशुमन आनंद का केंद्रीय रक्षा मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मिलने के बाद चर्चा उठी थी। लेकिन, राजनाथ राजपूत हैं तो जातिगत समीकरण में बात आकर गुजर गई। आनंद मोहन ने कांग्रेस नेता और एक्टर राज बब्बर से भी भेंट की। इस तरह तो वह हर दल के नेता से मिलते नजर आ रहे हैं। इसलिए, भाजपा में वह तुरंत जाएंगे- इसकी भी संभावना नहीं दिख रही है। वजह यह भी कि रिहाई के बाद भाजपा के कुछ नेताओं ने सवाल उठाया था तो आनंद मोहन ने उन्हें भाजपाई पुरखों की याद दिलाते हुए जमीन दिखाने का प्रयास किया था। आनंद मोहन से जुड़े क्षत्रिय नेताओं की मानें तो भाजपा से जुड़ने का फैसला लेंगे भी तो अंत में, फिलहाल नहीं।
भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से मिले आनंद मोहन के बेटे अंशुमन।
- फोटो : अमर उजाला
इन सभी के पीछे जातीय जनगणना के आंकड़े
आनंद मोहन जाति आधारित राजनीति की उपज हैं। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने ठाकुर विवाद में मुंह खोला तो
आनंद मोहन के बारे में यही बात की थी। इन्हें जातिवादी बताया था। उसके बाद राज्य की नीतीश कुमार सरकार ने
जातियों का आंकड़ा जारी कर दिया। इसमें अगड़ी जातियों की संख्या 15.52 प्रतिशत आ गई। लालू ने जिस भू-रा-बा-ल साफ करो का कभी नारा दिया था, वह जातीय जनगणना में लगभग साफ नजर आया। भूमिहार 2.89 प्रतिशत, राजपूत 3.45 प्रतिशत, ब्राह्मण 3.67 और लाला (कायस्थ) 0.6 प्रतिशत बताए गए। अगड़ी जाति के आंकड़ों में मुसलमानों की अगड़ी जातियां भी हैं। मतलब, हिंदू की चार प्रमुख अगड़ी जातियों की आबादी 10 फीसदी के आसपास है। चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं कि "जातीय जनगणना के बाद अब आने वाले चुनाव में राजद और जदयू पिछड़ी, अति पिछड़ी जातियों और मुसलमानों को लेकर गोलबंदी का प्रयास करेंगे, जबकि भाजपा हिंदुओं की एकजुटता की बात करते हुए अगड़ी जातियों को साथ रखने का प्रयास करेगी। ऐसे में आनंद मोहन के लिए गैर-सवर्ण जाति की वरीयता वाले दल में जाना शायद अफवाह ही हो।" ज्यादातर राजनीतिक विश्लेषकों की राय भी यही है कि आनंद मोहन अभी कुछ फैसला शायद नहीं करें, क्योंकि इससे उनके साथ रहने वाले राजपूत वोटर निर्णय लेने के लिए आजाद हो सकते हैं। साथ आ भी सकते हैं, छोड़ भी सकते हैं।