सुपौल सहित सहरसा, मधेपुरा, दरभंगा, मधुबनी खगड़िया, भागलपुर और कटिहार जिले के कोसी दियारा में बसे लोगों के लिए शनिवार का दिन आफत भरा हो सकता है। इसको लेकर राज्य सरकार ने संबंधित जिलाधिकारियों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। दरअसल, शुक्रवार को नेपाल प्रभाग स्थित कोसी नदी के जल ग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई है। वही शनिवार को बारिश और भी अधिक तेज होने की आशंका जताई जा रही है। जिसके बाद सुपौल जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कोसी तटबंध के अंदर बसी आबादी के लिए अलर्ट जारी किया है।
कोसी क्षेत्र के लिए बढ़ने वाली है मुसीबत
इस संबंध में सुपौल के डीएम कौशल कुमार ने बताया कि नेपाल प्रभाग स्थित कोसी के जल ग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश को देखते हुए कोसी नदी के डिस्चार्ज में शुक्रवार की सुबह से ही बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। शुक्रवार की शाम 6 बजे कोसी बराज से 1 लाख 11 हजार 290 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज रिकॉर्ड किया गया है। वही जलस्तर में लगातार वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं। जिलाधिकारी के अनुसार शनिवार की दोपहर 12 बजे कोसी बराज से 6 लाख 81 हजार 639 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने की संभावना है। ऐसे में कोसी नदी के पूर्वी और पश्चिमी तटबंध के बीच बसे लोगों को बाढ़ और कटाव का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि तटबंध के अंदर के इलाकों में माइकिंग कराई जा रही है। वही प्रशासनिक अधिकारियों को भी लोगों को सतर्क करने और आवश्यक बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को भी तटबंध की सुरक्षा के मद्देनजर सतत निगरानी के लिए कहा गया है।
अब तक रहा है 07 लाख 88 हजार 200 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज
करीब बीते 15 दिनों से कोसी बराज से पानी का डिस्चार्ज एक लाख क्यूसेक से भी कम रहा है। इस साल बराज से सर्वाधिक 3 लाख 93 हजार 715 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज 07 जुलाई को दिन के 03 बजे रिकॉर्ड किया गया था, जबकि वर्ष 2023 में सर्वाधिक 04 लाख 62 हजार 345 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज 14 अगस्त को रिकॉर्ड हुआ था। कोसी बराज के अब तक के इतिहास में सर्वाधिक 07 लाख 88 हजार 200 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज 05 अक्टूबर 1968 को रिकॉर्ड किया गया है।
बाढ़ आश्रय स्थल या ऊंचे स्थानों पर शरण लें लोग
कोसी नदी के जलस्तर में अचानक अप्रत्याशित वृद्धि के मद्देनजर जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कोसी नदी के दोनों तटबंधों के बीच बसे लोगों को जल्द से जल्द बाढ़ आश्रय स्थल अथवा नजदीक के ऊंचे स्थानों पर शरण लेने की अपील की है। जिलाधिकारी ने बताया कि अचानक जलस्तर में वृद्धि की वजह से तटबंध के अंदर अधिकांश इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने की संभावना है। वही कई स्थानों पर कटाव की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। शुक्रवार की रात से ही डिस्चार्ज में लगातार वृद्धि के संकेत हैं। लिहाजा अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की टीम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने लोगों से किसी भी प्रकार के अफवाह से बचने तथा गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल प्रशासन से संपर्क साधने की अपील की है।
जानिए कहां होगा बाढ़ का असर
सुपौल जिले में कुल 11 प्रखंड हैं। इसमें बसंतपुर, सरायगढ़ भपटियाही, किसनपुर, सुपौल सदर, मरौना और निर्मली प्रखंड के 32 पंचायत में बाढ़ का असर होगा। इन पंचायतों में करीब 25 हजार परिवार निवास करते हैं। इसके अतिरिक्त बाढ़ की स्थिति में कोसी के बहाव वाले अन्य जिलों में भी लाखों की आबादी प्रभावित होगी।