बिहार विधानसभा परिसर के द्वार पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित कर रहे पुलिस जवानों ने गुरुवार को नीतीश सरकार के मंत्री का अपमान कर दिया। जब यह खबर विधानसभा में पहुंची तो सदन ने हैरानी जताई।
राज्य के श्रम संसाधन मंत्री जिबेश कुमार मिश्रा ने सदन में कहा कि वह इसलिए लेट हो गए, क्योंकि ट्रैफिक पुलिस के जवानों ने रोक दिया। उन्होंने जब तक पटना के कलेक्टर व एसपी का काफिला वहां से नहीं गुजरा तब तक उन्हें परिसर में नहीं घुसने दिया।
कलेक्टर व एसएसपी मंत्री से बड़े हैं?
स्पीकर विजय कुमार सिन्हा को संबोधित करते हुए मंत्री मिश्रा ने कहा कि मुझे लगा कि मुख्यमंत्री या आपका काफिला हो सकता है, लेकिन बाद में पता चला कि यह कलेक्टर व एसएसपी का काफिला था, तो मैं हैरान रह गया। क्या कलेक्टर व एसएसपी मंत्री से बड़े हैं? मंत्री के अपमान पर विपक्षी, खासकर राजद विधायकों आलोक मेहता, ललित यादव, प्रहलाद यादव और कांग्रेस के अजीत शर्मा व माकपा माले के महबूब आलम ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
मंत्री का अपमान गंभीर मामला
संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह इस सदन की परंपरा रही है कि न केवल मंत्री बल्कि प्रत्येक सदस्य को सरकार का हिस्सा माना जाता है। इस प्रकार किसी सदस्य का अपमान एक गंभीर मामला है। चूंकि घटना विधानसभा परिसर के अंदर हुई थी, इसलिए कार्रवाई के बारे में फैसला करना अध्यक्ष का विशेषाधिकार है, लेकिन सरकार अपनी ओर से पर्याप्त कार्रवाई करने का वादा करती है। स्पीकर सिन्हा ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। मैंने वर्तमान सत्र के उद्घाटन के दिन सदन की गरिमा को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था। मामले को कार्य मंत्रणा समिति विचार करेगी।
बिहार भाजपा ने की कार्रवाई की मांग
मंत्री जिबेश कुमार मिश्रा के समर्थन में उनकी पार्टी उतर आई है। बिहार भाजपा के प्रमुख संजय जायसवाल ने सख्त बयान जारी किया। जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति अधिकारियों के विनम्र होने की आवश्यकता पर बल दिया था। यह एक परंपरा है जिसका देश भर में पालन किया जाता है। बिहार में कुछ नौकरशाह एक प्रकार के राजसी अहंकार से भरे हैं। स्पीकर को संज्ञान लेकर कार्रवाई करना चाहिए।