बिहार बोर्ड की मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है, सवाल इसलिए भी हैं कि इस बार सरकार ने सख्ती की तो हाईस्कूल में रिजल्ट घटकर मात्र 46.66 फीसदी रह गया, बीते वर्ष तक यह 75.15 फीसदी था। इंटरमीडिएट का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा, जहां आर्ट स्ट्रीम में 56.73 फीसदी छात्र-छात्राएं ही सफल हो पाए जबकि साल 2015 में 86.47 फीसदी छात्रों ने सफलता के झंडे गाड़े थे। साइंस स्ट्रीम में 67.06 छात्रों को ही सफलता मिली।
सवाल इसलिए भी हैं कि सख्ताई करने पर रिजल्ट घटने का सीधा सा अर्थ है कि बीते सालों तक यह परीक्षा साफ सुथरे तरीके से पूरी नहीं हो पाती थी। यही वह दौर था जब परीक्षार्थियों को नकल कराने के लिए परीक्षा केंद्र की बिल्डिंग पर छज्जों से लटके परिजनों की तस्वीर ने देश ही नहीं दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थी।
लेकिन इस बार के रिजल्ट को देखकर आप अगर ये मान बैठे हैं कि इस बार बिहार में बोर्ड परीक्षाएं पाक साफ तरीके से संपन्न हुई है तो बोर्ड के नए नवेले टॉपर आपका ये मुगालता दूर कर सकते हैं। आपको यह जवाब बेशक थोड़ा अटपटा सा लगे लेकिन जब इंटर में आर्ट स्ट्रीम से पूरे प्रदेश में टॉप करने वाली छात्रा ढंग से अपने विषयों के बारे में ही नहीं बता पाए तब उस व्यवस्था पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है। साइंस स्ट्रीम का टॉपर जब साइंस के एक साधारण से सूत्र को बताने में अटकने लगे तो सवाल अपने आप खड़े हो जाते हैं।
सवाल इसलिए भी हैं कि ये दोनों ही टॉपर एक ही विद्यालय के हैं, उस विद्यालय के जहां से हर साल थोक के भाव छात्र मेरिट लिस्ट में जगह बनाते हैं। दो साल पहले कालेज संचालक की बेटी ने यहीं से पूरे प्रदेश में टॉप किया था।
आर्ट की टॉपर छात्रा को ही नहीं है अपने विषयों की जानकारी
आइए अब आपको उस खास विद्यालय के बारे में भी बता देते हैं। हर साल टॉपर देने वाला यह विद्यालय है वैशाली जिले के किरतपुर में स्थित विशुन देव राय महाविद्यालय। इस कालेज के संचालक हैं बच्चा राय। लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से ताल्लुक रखने वाले बच्चा राय की बेटी शालिनी राय ने भी साल 2014 में इसी विद्यालय से पढ़ाई करते हुए हाईस्कूल में 97 फीसदी अंक लाकर पूरे प्रदेश में टॉप किया था।
इस साल इंटरमीडिएट आर्ट और साइंस के टॉपर भी यहीं से हैं। आर्ट की टॉपर बनी हैं हाजीपुर जिले की रूबी राय। जिन्होंने 500 में से कुल 444 अंक पाकर पूरे प्रदेश में टॉप किया है, खास बात ये है कि खुद रूबी को भी नहीं पता कि उन्हें जो नंबर मिले हैं वो 500 में से मिले हैं या 600 में से।
रूबी के इस ज्ञान का खुलासा भी तब हुआ जब टॉप करने पर पत्रकारों ने उनसे पूछा कि उनके पास इंटरमीडिएट में कौन-कौन से विषय थे। थोड़ा झिझकते हुए रूबी ने जवाब दिया हिंदी... इंग्लिश....ज्योग्रॉफी....म्यूजिक और प्रोडिकल साइंस। अंतिम विषय जब समझ नहीं पाया तो दोबारा पूछा गया लेकिन जवाब तब भी वही था .....प्रोडिकल साइंस।
बस इसी विषय ने रूबी की पूरी पोल खोल दी। जब उनसे इस खास विषय के बारे में पूछा गया तो रूबी का जवाब था इसमें खाना बनाना पड़ता है। जब पूछा गया कि फिर होम साइंस क्या होता है इस पर बिहार बोर्ड की टॉपर बगले झांकने लगती हैं।
उनसे पूछा गया कि इंटरमीडिएट में कुल कितने मार्क्स में से नंबर मिलते हैं, तो उसका जवाब था 600 मार्क्स। जबकि यह बात तो बोर्ड एग्जाम में बैठने वाला हर छात्र जानता है कि पांच विषय होने के कारण कुल 500 में से इंटरमीडिएट में मार्क्स दिए जाते हैं। लेकिन रूबी का आत्मविश्वास ऐसा कि उसने यह भी बताया कि उसे तो 600 में से 444 अंक मिले हैं।
साइंस के टॉपर को नहीं साधारण से सूत्र की जानकारी
ऐसा नहीं है यह हाल आर्ट टॉपर का ही है, साइंस टॉपर की स्थिति भी जान लीजिए। साइंस में संयुक्त रूप से तीन छात्रों ने टॉप किया है, इनमें से ही एक हैं सौरभ श्रेष्ठ। टॉप करने के बाद सौरभ ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि वो आईएएस बनना चाहते हैं, लेकिन जब उनसे साइंस के एक साधारण से सूत्र के बारे में पूछा गया तो वह उसका भी जवाब नहीं दे पाए।
रिपोर्टर ने फिर सवाल दागा लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। सौरभ और रूबी ने जिस कालेज से पढ़ाई करके टॉप किया है उस पर हर साल कुछ न कुछ आरोप लगते रहे हैं। दो साल पहले 12वीं परीक्षा का जब रिजल्ट आया तो कालेज के 222 छात्रों के अंक बिल्कुल एक समान थे।
जिसके बाद उनका रिजल्ट रोक दिया गया। हालांकि इन सब आरोपों से बेखबर कालेज संचालक बच्चा राय दावा करते हैं कि हमारे यहां पढ़ाई का स्तर ही ऐसा है कि बच्चे टॉप करते हैं। किसी को फिर भी शक है तो आरटीआई के माध्यम से कॉपियां देख सकता है।