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Bihar Mahashivratri 2023: शादी में विलंब हो रहा हो या बार-बार शादी अटक रही, उनके लिए खास है यह महाशिवरात्रि

Sat, 18 Feb 2023 07:33 AM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

आज महाशिवरात्रि है। बिहार के सभी जिलों के शिव मंदिरों में अहले सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लगी हुई है। हर-हर महादेव के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज रहा है। मान्यता है कि आज महादेव और शक्ति के मिलन का दिन है। 
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भागलपुर के बाबा बूढ़ानाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज महाशिवरात्रि है। बिहार के सभी जिलों के शिव मंदिरों में अहले सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लगी हुई है। हर-हर महादेव के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज रहा है। मान्यता है कि आज महादेव और शक्ति के मिलन का दिन है। बनारसी और मिथिला पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस बार खास संयोग बन रहा है। कहा जाता है कि महाशिवरात्रि उपवास और ध्यान की रात होती है। आज के दिन भक्त भगवान शिव और पार्वती की पूजा करते हैं। और शक्ति और जीवन में मार्गदर्शन के लिए भगवान भोले शंकर का आशीर्वाद मांगते हैं। "अमर उजाला" आपको बिहार के प्रमुख शिव मंदिरों के बारे में बता रहा है। साथ ही हमारी टीम ने बिहार के विख्यात ज्योतिषाचार्य और प्रकांड पंडितों से बातचीत की। आइए जानते हैं इस बार का महाशिवरात्रि कैसे है खास और कैसे करें भगवान शिव की पूजा...
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मंदिरों में सुबह से ही उमड़ रही श्रधालुओं की भीड़

मंदिरों में सुबह से ही उमड़ रही श्रधालुओं की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
रात में रूद्राभिषेक कराएं, ज्यादा पुण्य मिलेगा
ज्योतिष विशेषज्ञ मृत्युंजय शर्मा के अनुसार, शनिवार को शिवरात्रि की पूजा शुभ मुहूर्त शाम 6:13 से शुरू होगा और रविवार सुबह 6:56 तक रहेगा। चतुर्दशी तिथि शनिवार रात 8:02 बजे से शुरू हो रही है और यह रविवार के सूर्योदय से पहले 4:18 तक रहेगी। इसमें सबसे शुभ निशिता काल में शनिवार रात 12:09 बजे से एक बजे रात तक का समय है। जो लोग इस रात में रूद्राभिषेक कराएं, उन्हें ज्यादा पुण्य मिलेगा। जो यह नहीं कर सकेंगे, वह शिव रूद्राष्टक, शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव चालीसा आदि का पाठ करना चाहिए और सुबह शिवालय जाकर दूध या पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। पंचामृत में दूध, दही, शक्कर, घी और शहद रहना चाहिए। अभिषेक के बाद सफेद चंदन का तिलक लगाना चाहिए और सफेद फूल या माला चढ़ाना चाहिए। आक का फूल मिले तो श्रेष्ठ है। धतूरा, भांग भी चढ़ाना चाहिए और इस दौरान ऊं नम: शिवाय का जाप करना चाहिए। जिनकी शादी में विलंब हो रहा हो या बार-बार शादी अटक रही, उन्हें इन बातों का ध्यान रखते हुए शिवरात्रि करना चाहिए।

भागलपुर का बाबा बूढ़ानाथ मंदिर

भागलपुर का बाबा बूढ़ानाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
बाबा बूढ़ानाथ मंदिर
भागलपुर के बाबा बूढ़ानाथ मंदिर के मुख्य गेट के पास सुबह 5 बजे से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। बड़ी संख्या में महिलाएं व पुरुष जलाभिषेक को लेकर कतारबद्ध हो अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। श्रद्धालु गंगा घाट से जल भरकर जलाभिषेक के लिए पहुंचे। शिव पुराण के अनुसार, ताड़का सुर का वध करने के बाद वशिष्ठ मुनी अपने शिष्य राम और लक्ष्मण के साथ गंगा नदी के तट पर पहुंचे थे। उन्होंने यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा-अर्चना की थी। अंग क्षेत्र के इस अति प्राचीन मंदिर में भगवान शंकर, माता पार्वती एवं शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा आदि प्रतिमा स्थापित है। 

भागलपुर जिले के सुल्तानगंज का बाबा अजगैबीनाथ धाम

भागलपुर जिले के सुल्तानगंज का बाबा अजगैबीनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
भागलपुर जिले के सुल्तानगंज का बाबा अजगैबीनाथ धाम
भागलपुर जिले के सुल्तानगंज का बाबा अजगैबीनाथ धाम देश का एक मात्र शिवलिंग है जिसे दो नामों से पुकारा जाता है। यहां श्रद्धालु अजगैबीनाथ के साथ साथ बाबा बैद्यनाथ के नाम से भी श्रद्धालु जल चढ़ाते हैं।अजगैबीनाथ में तीन शिवलिंग विराजमान है। इसमें एक आज के मीना बाबा, वैद्यनाथ धाम और बाबा बासुकी नाथ धाम का शिवलिंग है। 

सोनपुर का बाबा हरिहरनाथ मंदिर

सोनपुर का बाबा हरिहरनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
बाबा हरिहरनाथ मंदिर (सोनपुर)
मान्यता है कि खुद भगवान ब्रह्मा ने इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी। विश्व का इकलौता यह मंदिर सोनपुर में है, जहां शिवलिंग और भगवान विष्णु की मूर्ति एक ही जगह स्थापित है। मान्यता यह भी है कि शिवरात्रि में दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। जलाभिषेक के लिए अहले सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लग गई। गंडक नदी के काली घाट पर सैकड़ों भक्त स्नान कर बाबा हरिहरनाथ मंदिर पहुंचे हैं।

मधेपुरा जिला के बाबा सिंहेश्वर नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़

मधेपुरा जिला के बाबा सिंहेश्वर नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ - फोटो : अमर उजाला
बाबा सिंहेश्वर नाथ मंदिर (मधेपुरा)
कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल के सबसे प्रमुख मंदिर कहे जाने वाले बाबा सिंहेश्वर नाथ मंदिर में अहले सुबह 3 बजे से ही भक्तों की लंबी कतार लग गई। मंदिर प्रबंधन द्वारा अहले सुबह करीब 3 बजे ही गर्भगृह का पट खोल दिया गया। देखते ही देखते दूधिया रोशनी में ही श्रद्धालुओं की भीड़ बाबा के जलाभिषेक के लिए उमड़ने लगी। मनोकामना लिंग के नाम से प्रसिद्ध सिंहेश्वर नाथ मंदिर में करीब एक लाख से अधिक शिव भक्तों के पहुंचने की संभावना है। मान्यता है कि बाबा सिंहेश्वर नाथ मनोकामना लिंग के नाम से प्रसिद्ध है। यहां जो भी भक्त सच्चे दिल से जो कुछ बाबा सिंहेश्वर नाथ से मांगते हैं तो उनकी हर मनोकामना पूरी होती है। पंडित बताते हैं कि इस मंदिर को किसी काल में स्वयं भगवान विष्णु ने बनाया था। इसके अलावा पांडवों ने विराटनगर नेपाल के भीम बांध क्षेत्र में शरण लेने के पश्चात सिंहेश्वर में शिव की पूजा की थी।

मुजफ्फरपुर का बाबा गरीब नाथ मंदिर

मुजफ्फरपुर का बाबा गरीब नाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
बाबा गरीब नाथ मंदिर (मुजफ्फरपुर)
मुजफ्फरपुर में बाबा गरीब नाथ मंदिर में सुबह करीब 4:00 बजे से ही भक्त भगवान शिव को जलाभिषेक करने के लिए लाइन में लग गए। जलाभिषेक के बाद भक्त नंदी के कान में कुछ कहकर अपनी मुराद पूरा करने की गुहार लगा रहे हैं। मंदिर प्रशासन की मानें तो इस शिवरात्रि बाबा गरीबनाथ मंदिर में करीब डेढ़ लाख भक्त महादेव पर जलाभिषेक करेंगे। इधर, भीड़ को देखते हुए करीब 500 वोलेंटियर्स तैनात किए हैं ताकि मंदिर परिसर में भीड़ इकट्ठा नहीं हो। इसका ख्याल रखा जाएगा।

पूर्वी चंपारण का सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर 

पूर्वी चंपारण का सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
पूर्वी चंपारण का सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर 
पूर्वी चंपारण के अरेराज स्थित ऐतिहासिक सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर में भी अहले सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लग चुकी है। पूरे मंदिर परिसर हर-हर महादेव की गूंज है। यहां नेपाल से भी दर्जनों भक्त पहुंचे हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में चंद्र देव ने शिवलिंग स्थापित किया था। इस ऐतिहासिक मंदिर की चर्चा स्कन्द पुराण में भी मिलती है। यहां सच्चे मन से मांगने वाले लोगों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इस कारण इसे मनोकामना नाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर प्रशासन की ओर से भीड़ को देखते हुए कार्यकर्ता लगाए गए हैं। मंदिर के गेट पर पुलिसकर्मी भी तैनात किए हैं। 

पटना का खाजपुरा शिव मंदिर

पटना का खाजपुरा शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
अब छोटे मंदिरों में भी भीड़ बढ़ रही
बिहार के मंदिरों और शिवरात्रि के बारे में ज्योतिष विज्ञान के जानकार मुकेश महान कहते हैं कि अब छोटे मंदिरों में भी भीड़ बढ़ रही है। गांवों में भी आठ-दस वर्षों से श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ रही है। नई पीढ़ी की लड़कियां अब शिवरात्रि बहुत ज्यादा कर रही हैं। पटना में फतुहा के बैकटपुर, मुजफ्फरपुर के गरीबनाथ, भागलपुर के बूढ़ानाथ, गढ़पुरा के हरिगिरिधाम आदि मंदिरों में इस अवसर पर भारी भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा समस्तीपुर के विद्यापतिनगर में महादेव और गंगाजी से जुड़ी मान्यताओं के कारण लोग आस्था के साथ जुटते हैं। प्रदेश के बाकी इलाकों से अलग बेगूसराय में गाजर-बेर के साथ छीमी (मटर दाने की फली) भी चढ़ाते हैं। 
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गूंज रहा हर हर महादेव

गूंज रहा हर हर महादेव - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि से ज्यादा महत्व किसी अन्य पूजा का नहीं
पंडित सूर्यबली झा ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के राघवेंद्र झा उर्फ हीराजी कहते हैं कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार महादेव की उपासना के लिए महाशिवरात्रि से ज्यादा महत्व किसी अन्य पूजा का नहीं है। इसकी महत्ता महिलाओं के लिए ज्यादा मानी जाती है। माना जाता है कि महिलाएं महाशिवरात्रि व्रत-पूजा करें तो माता भगवती के साथ महादेव का आशीर्वाद मिलता है। सुख, सौभाग्य और परिवार के आरोग्य के लिए इसका अत्यधिक महत्व है।
 
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