पूर्व रेल मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को लेकर उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल में अब भी कोई संदेह नहीं है। राजद में उनके पद-कद को लेकर कई तरह की कयासबाजी चल रही थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की शनिवार को पटना में हुई बैठक में एक बात तय हो गई कि आने वाले समय में लालू प्रसाद यादव और उनके छोटे बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव का एक समान महत्व मान लिया गया है।
इसके साथ ही फैसला हुआ कि राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया इस साल अक्तूबर की जगह अप्रैल से शुरू होकर 21 जून तक पूरी कर ली जाएगी। पार्टी ने अपने संविधान में भी संशोधन किया है। इस संशोधन के बाद, अब अगर राजद में टूट होती है तो इसे नाम, चुनाव चिह्न या झंडे पर चुनाव आयोग का फैसला नहीं बल्कि लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव का निर्णय मान्य होगा। महाराष्ट्र में शिवसेना प्रकरण को देखते हुए यह बदलाव किया गया है।
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार बनाने की तैयारी बताई
राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने प्रस्ताव पेश किया कि राजद का वर्तमान सांगठनिक सत्र 10 अक्टूबर 2025 को समाप्त होने वाला है और चूंकि इसी साल सितंबर-अक्तूबर में बिहार विधानसभा चुनाव होना है, इसलिए सांगठनिक सत्र 2025-28 के लिए चुनाव कार्यक्रम को पहले कराया जाए। इसके मद्देनजर 2025-28 के लिए प्राथमिक और सक्रिय सदस्य बनाने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 निर्धारित की गई है। इस बार अप्रैल में ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराने की तैयारी है, ताकि बिहार विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ा जाए और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार बनाई जाए। संगठनात्मक चुनाव के लिए राष्ट्रीय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी पूर्व मंत्री रामचंद्र पूर्वे को बनाया गया है। सहायक राष्ट्रीय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी पार्टी प्रवक्ता चितरंजन गगन को बनाया गया है।
लालू-राबड़ी के साथ परिवार से मीसा-तेज भी पहुंचे
मिशन 2025 विधानसभा समेत कई मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक पटना के होटल मौर्या में हुई। बैठक में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साथ उनकी उनकी पत्नी राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, प्रदेश अध्यक्ष राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, सांसद मीसा भारती, पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव, वरीय नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, शिवानंद तिवारी समेत कई वरीय नेता पहुंचे। वहीं कार्यक्रम के बाद बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि हमें बिहार को शीर्ष राज्यों में ले जाएंगे। यही हमलोगों का पहला लक्ष्य है। हमारे पास सबको साथ लेकर बिहार को आगे ले जाने का विजन और ब्लूप्रिंट है। खुशी की बात है कि पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर पार्टी के महाधिवेशन का निर्णय लिया गया है। काफी कठिन परिस्थितियों में राजद का गठन हुआ था। पार्टी नेताओं को सघन रूप से सदस्य अभियान चलाने के साथ ही हर बूथ पर कम से कम दो क्रियाशील सदस्य निश्चित रूप से बनाने को गंभीरता से लेने को कहा गया है। तेजस्वी ने हर बूथ पर बूथ कमेटी बनाना सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि पार्टी में फांकेबाजी नहीं चलेगी। पार्टी के लिए काम करने वालों को हीं पार्टी में जिम्मेदारी दी जाएगी और उन्हें उचित सम्मान दिया जाएगा। पार्टी में किसी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नहीं दिखा जगदानंद सिंह और उनका परिवार
इधर, चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले कुछ दिनों से राजद कार्यालय नहीं गए प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नहीं दिखे। इतना ही नहीं उनके बेटे और सांसद सुधाकर सिंह भी बैठक में शामिल नहीं हुए। जबकि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सभी वरीय नेताओं को शामिल होने का निर्देश पूर्व में ही दिया जा चुका था। पिता-पुत्र के नहीं आने के बाद सियासी गलियारे में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
अगला राष्ट्रीय महाधिवेशन पटना में
पार्टी का अगला राष्ट्रीय महाधिवेशन पटना में करने का निर्णय लिया गया।बैठक का उद्घाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने अपने सम्बोधन में कहा कि "तेजस्वी काफी मेहनत कर रहे हैं। अबतक हजारों किलोमीटर की यात्रा उन्होंने पूरी की है। देखकर खुशी होती है कि जिस समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को लेकर राजद का गठन हुआ था उसे वे आगे बढ़ा रहे हैं।" इससे पहले, प्रदेश पार्टी की ओर से प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने स्वागत किया। प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के नहीं आने की वजह अस्वस्थता बताई गई। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने महासचिव का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें पिछले कार्यसमिति की बैठक से लेकर अबतक के पार्टी गतिविधियों का ब्यौरा और भावी कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। इसके बाद राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने सांगठनिक चुनाव के कार्यक्रम को पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। बैठक को केरला, नागालैंड, झारखंड, महाराष्ट्र , गुजरात,और जम्मू कश्मीर सहित अन्य राज्यों के अध्यक्षों ने सम्बोधित किया। बैठक में पच्चीस राज्य इकाईयों के अध्यक्ष सहित राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी सदस्यों के अलावा विशेष आमंत्रित के रूप पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल थे।