फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिहार-झारखंड में बंटवारा: गृह मंत्री के सामने सोन नदी जल बंटवारे पर दोनों राज्यों में एमओयू; किसे-क्या मिला?

Mon, 31 Aug 2026 06:57 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar News: बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर 25 वर्षों से लंबित विवाद का समाधान हो गया है। दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। समझौते के तहत बिहार को 5.75 एमएएफ और झारखंड को 2.00 एमएएफ पानी आवंटित किया गया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोन नदी जल बंटवारे के समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया है। 
विज्ञापन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ सीएम सोरेन और सम्राट चौधरी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार एवं झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर पिछले 25 वर्षों से लंबित विवाद का समाधान हो गया। दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के उप मुख्यमंत्री-सह-जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी तथा दोनों राज्यों एवं केंद्र सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।
विज्ञापन


25 साल पुराने विवाद पर लगा विराम
मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी ने इस ऐतिहासिक समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सक्रिय प्रयास, निरंतर संवाद और प्रभावी मध्यस्थता के कारण वर्षों से लंबित एवं जटिल विषय का समाधान संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि यह केवल जल बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि बिहार और झारखंड के बीच सहयोग, विश्वास और साझा विकास का नया अध्याय है।

झारखंड के सीएम ने भी जताया आभार
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोन नदी  जल बंटवारे के समाधान के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन



क्या था सोन नदी का 25 साल पुराना विवाद
मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी ने कहा कि वर्ष 1973 के बाणसागर समझौते के तहत सोन नदी के कुल 14.25 मिलियन एकड़ फीट जल में से मध्य प्रदेश को 5.25 एमएएफ, उत्तर प्रदेश को 1.25 एमएएफ तथा तत्कालीन अविभाजित बिहार को 7.75 एमएएफ जल आवंटित किया गया था। वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के गठन के बाद अविभाजित बिहार के हिस्से के 7.75 एमएएफ जल के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ, जो पिछले 25 वर्षों से लंबित था।

सीएम ने कहा कि 10 जुलाई 2025 को रांची में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक में इस विषय पर महत्वपूर्ण सहमति बनी थी। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर चर्चा हुई और तकनीकी विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप आज इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया।

बिहार को 5.75 और झारखंड को 2 एमएएफ पानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए समझौते के तहत बिहार को 5.75 एमएएफ तथा झारखंड को 2.00 एमएएफ सोन नदी का जल आवंटित करने पर औपचारिक सहमति बनी है। इससे विशेष रूप से दक्षिण बिहार और झारखंड के पठारी एवं सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल उपलब्धता बेहतर होगी। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, पेयजल संकट कम होगा तथा औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही दोनों राज्यों की दीर्घकालिक जल सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

यह भी पढ़ें: बिहार शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को झटका, 32,388 पदों पर आवेदन प्रक्रिया स्थगित

उन्होंने कहा कि समझौते के बाद सोन नदी के जल के बेहतर उपयोग के लिए जलाशय निर्माण तथा सोन नदी को फल्गु नदी से जोड़ने की प्रस्तावित परियोजनाओं पर भी तेजी से काम किया जा सकेगा। इससे गयाजी सहित दक्षिण बिहार के कई क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ेगी। फल्गु नदी में पर्याप्त जल रहने से पितृपक्ष मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को तर्पण एवं पिंडदान में भी सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने इसे पूर्वी भारत की कृषि एवं आर्थिक गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। सीएम सम्राट ने कहा कि यह समझौता केवल बिहार और झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के जल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास के लिए दूरगामी महत्व रखता है। 

जुलाई में चार राज्यों के बीच हुआ था समझौता 
7 जुलाई को नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हुआ। यह समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में मील का पत्थर है, जिसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान के रूप में हल किया गया है।
विज्ञापन


जून में राजस्थान और हरियाणा के बीच हुआ समझौता
29 जून को यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइंस के जरिए राजस्थान तक पहुंचेगा। इस परियोजना का मकसद पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के ज़रिए राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुँचाना है। इससे राजस्थान, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बँटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें