प्रेस विज्ञप्ति पर न अधिकारी का नाम है और न हस्ताक्षर।
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पत्र संकाय सदस्य का, विज्ञप्ति बिना हस्ताक्षर
वीडियो को लेकर BIPARD के एक संकाय सदस्य के हस्ताक्षर से एक पत्र जारी हुआ है, जिसमें बिना हस्ताक्षर की एक प्रेस विज्ञप्ति भी संलग्न है। इस प्रेस विज्ञप्ति में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के चाल-चलन की पूरी कहानी लिखी है। आरोपों की पूरी कहानी की शुरुआत में इस वीडियो का जिक्र करते हुए लिखा गया है- "वायरल वीडियो पूर्व के समय में बिहार निबंधन सेवा के पदाधिकारियों के साथ की जा रही बैठक का है। बिहार निबंधन सेवा के पदाधिकारियों के द्वारा प्रशिक्षण के दौरान बिहार प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु पदाधिकारियों के द्वारा किए गए अमर्यादित व्यवहार के संबंध में शिकायत दर्ज की गई थी, जिसपर तत्क्षण महानिदेशक के मुख से 'असंदर्भित कुछ शब्द' निकल गए। इस पर महानिदेशक द्वारा खेद प्रकट कर दिया गया है।" असंदर्भित का अर्थ होता है, वाकये से जिसका कोई मतलब नहीं हो। जबकि, हकीकत यह है कि जो गालियां वीडियो में सुनाई दे रहीं, उसे लिखा भी नहीं जा सकता है।
बासा की ओर से आईएएस अधिकारी के खिलाफ दी गई तहरीर।
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IAS अधिकारी के सामने खड़ा हुआ BAS संघ
राज्य के सीनियर IAS अधिकारी केके पाठक ऐसे ही कांडों के कारण चर्चित रहे हैं, लेकिन इस बार इनका पाला बिहार प्रशासनिक सेवा संघ (BASA) से पड़ गया है। वीडियो की सीडी के साथ पटना में विधानसभा के सामने स्थित सचिवालय थाने में BASA के महासचिव सुनील कुमार तिवारी ने लिखित शिकायत दी है कि नया सचिवालय के सभागार में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और बिहार के लोगों के बारे में अपमानजनक शब्द बोलने पर सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया जाए। दिन में दी गई इस तहरीर पर रात साढ़े 9 बजे तक कोई प्रक्रिया नहीं हुई थी। थानाध्यक्ष के अनुसार- "शिकायत वापस नहीं ली गई है। इसपर विधि-सम्मत कार्यवाही/कार्रवाई होगी।" खेद की एक लाइन और आरोपों की झड़ी को देखते हुए लगता नहीं कि BASA इसपर पीछे हटेगा। संघ ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इसपर दखल की फरियाद की है। इसके अलावा मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार ने भी संज्ञान लिया है। सुनील कुमार रिटायर्ड IPS अधिकारी भी हैं।