बिहार में स्वास्थ्य केंद्र की जमीन बेचने से जुड़ा घोटाला सामने आया है। मुजफ्फरपुर में भू-माफियाओं ने स्वास्थ्य विभाग की जमीन को ही बेच दिया जिसके बाद सरकार में हड़कंप मच गया है। मामले का खुलासा तब हुआ जब जमीन से जुड़े दस्तावेज अप्रूवल के लिए सर्किल अधिकारी के पास पहुंचे। फिलहाल दस्तावेजों के अप्रूवल पर रोक लगा दी गई है। इस घटना के बाद गांव के लोग इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने अपील की है कि अस्पताल को बंद न किया जाए क्योंकि उनके पास इलाज के लिए आस-पास कोई भी सुविधा मौजूद नहीं है।
करीब 50 साल पहले सरकारी स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था
भूमि सुधार और राजस्व मंत्री राम सूरत कुमार ने सोमवार को कहा कि करीब 50 साल पहले जिस जमीन पर एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया था, उस जमीन के एक हिस्से को बेचकर पंजीकृत होने की बात सामने आया है। इसके बाद अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं। जमुरा पंचायत प्रखंड के मुरौल गांव में 1975 में स्थापित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अब काम नहीं कर रहा है और भवन जर्जर हालत में है। मंत्री ने कहा कि यह गंभीर मामला है और इसकी उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के स्वास्थ्य केंद्र की जमीन को कैसे बेचा और पंजीकृत किया गया, इसकी गहन जांच की जानी चाहिए।
ऐसे सामने आया मामला, जांच के आदेश
मामला तब सामने आया जब स्थानीय अंचल अधिकारी पंकज कुमार को बेची गई जमीन के म्यूटेशन का अनुरोध मिला। स्वास्थ्य केंद्र की कुल जमीन का करीब 36 डेसीमल हिस्सा बेचा जा चुका है। जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जमीन के दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।उन्होंने कहा कि बेची गई जमीन करोड़ों में होनी चाहिए।
इस महीने की शुरुआत में बिहार के रोहतास जिले में खुद को सरकारी अधिकारी बताकर कुछ लोगों ने 60 फीट लंबे स्टील पुल को तोड़कर उसे चोरी कर लिया था। 500 टन वजनी निष्क्रिय पुल 1972 में एक नहर के ऊपर बनाया गया था। इस मामले में जल संसाधन विभाग के एक उप-मंडल अधिकारी सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।