अररिया के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सह विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट मनोज कुमार तिवारी की कोर्ट ने गांजा तस्करी के मामले में दो लोगों को दोषी करार दिया है। वही मामले में एक आरोपी को बरी कर दिया गया है। मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है, जिसकी वजह से उनके विरुद्ध ट्रायल लंबित है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो पटना के विशेष लोक अभियोजक धर्मेंद्र कामत ने बताया कि एनसीबी वाद संख्या 03/23 की सुनवाई के क्रम में कोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। सजा के बिंदु पर सुनवाई 19 अप्रैल को होगी। मामला अररिया जिले के नरपतगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत बसमतिया ओपी के बेला गांव का है। जहां 18 फरवरी 2023 को एसएसबी 45वीं बटालियन तथा बसमतिया ओपी पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग घरों से कुल 653.95 किलो गांजा बरामद किया था।
मामले में चार लोग प्राथमिकी अभियुक्त बनाए गए थे। जबकि जांच के क्रम में सुपौल के बलुआ बाजार के निवासी निजामुद्दीन का नाम आया था, जिसे कोर्ट ने ट्रायल के दौरान बरी कर दिया। मामले में बेला निवासी दिनेश पासवान, उसके पुत्र दीपेश कुमार, पड़ोस के ही सुनील पासवान और उसके रिश्तेदार फुलचंद पासवान के विरुद्ध मुकदमा दर्ज है। दिनेश और सुनील अब तक पुलिस और एनसीबी की गिरफ्त से बाहर है। जबकि अन्य दो की गिरफ्तारी छापेमारी के दौरान ही हुई थी। दोनों को कोर्ट ने एनडीपीएस की धारा 20 (डी) (02) (सी)/25/29 के तहत दोषी करार दिया है।
ट्रायल में एसएसबी और एनसीबी की ओर से पेश हुए तीन-तीन गवाह
एनसीबी के विशेष लोक अभियोजक धर्मेंद्र कामत ने बताया कि ट्रायल के दौरान एसएसबी की ओर से उप कमांडेंट शैलेश कुमार सिंह, इंस्पेक्टर अविनाश कुमार सिंह और कांस्टेबल अभिषेक द्विवेदी ने गवाही दी। वही एनसीबी की ओर से केस के अनुसंधानकर्ता सह पटना जोन के इंटेलिजेंस ऑफिसर परमहंस कुमार, जूनियर इंटेलिजेंस ऑफिसर दीपक कुमार व पटना अधीक्षक सह मालखाना प्रभारी राजन कुमार ने गवाही दी। इसके अतिरिक्त एक स्वतंत्र गवाह भी कोर्ट में पेश कराया गया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता संगीता कुमारी ने दलील पेश की।