बिहार विधानसभा के अंदर ही नहीं, सदन के बाहर पोर्टिको में दिए विपक्षी सदस्यों के बयानों को तवज्जो देना सभी मीडिया के लिए आसान नहीं होगा। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) कोटे से विधानसभा अध्यक्ष बने अवध बिहारी चौधरी ने मानसून सत्र के पहले शुक्रवार को प्रेस सलाहकार समिति की बैठक कर सलाह दी कि प्रजातंत्र को शर्मशार करने वाले हल्के बयानों को नजरअंदाज किया जाए। हल्का या प्रजातंत्र को शर्मशार करने वाला बयान क्या होता है, इसपर अब बहस होगी। मानसून सत्र की शुरुआत से पहले विपक्ष के लिए यह मुद्दा बन सकता है, क्योंकि विपक्ष पहले ही चौधरी पर बातों को दबाने और समय नहीं देने का आरोप लगाता रहा है। इसके अलावा विपक्ष कई मुद्दों पर वाकआउट कर सदन के बाहर ही मीडिया के सामने अपनी बात रखता है।
विजय सिन्हा ने कहा कि बिहार विधानसभा अध्यक्ष का पद एक गरिमामय पद होता है। मैं उनका और उनके पद का सम्मान करता हूं। इसलिए विधानसभा अध्यक्ष को चाहिए वह अपनी और अपने पद की गरिमा को समझें। उन्हें किसी पार्टी के प्रवक्ता की तरह बात नहीं करनी चाहिए।
आसन सदन के संरक्षक के रूप में दिखाई दें, उन्हें निष्पक्ष रहना चाहिए
दरअसल, इससे पहले विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा के 5 विधायकों को चेतावनी दी थी। इसका भाजपा विधायकों ने जमकर विरोध किया था। इसके बाद मीडिया से सामने आकर विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी को
खूब खरी-खोटी सुनाई थी। नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने कहा था कि मैं भी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रह चुका हूं। यह भूल गए कि जो आया है, उसको जाना है। हवाबाजी में मत रहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष की मर्यादा का हनन करता है तो उस पर भी विचार होगा। यह भ्रम में नहीं रहिएगा कि आप मर्यादा के विपरीत कोई कार्य करेंगे तो कोई सुनवाई नहीं होगी। ऐसे मैं आसन (विस अध्यक्ष) का बहुत सम्मान करता हूं। आसन के प्रति मेरी पूरी आस्था है। आसन सदन का संरक्षक होता है। इसलिए आसन सदन के संरक्षक के रूप में दिखाई दें उन्हें निष्पक्ष रहना चाहिए।