बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने राज्य में 7.77 लाख फर्जी राशन कार्ड ढूंढ निकाले हैं। यह कार्ड विभाग के आंतरिक समीक्षा के दौरान पकड़े गए हैं।
पकड़े गए राशन कार्डों से सरकार को 3.23 करोड़ रुपये हर महीने का नुकसान हो रहा था।
इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार विभाग ने अब राज्य के सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन कार्डों को रद्द करने के निर्देश दिए हैं।
विभाग ने जिला अधिकारियों को यह भी कहा है कि वे पता लगाएं कि इन राशन कार्डों को बनाने वाला कौन है। वहीं इस मामले पर अधिकारियों ने क्षेत्रीय राशन डीलरों पर धांधली बरतने की आशंका जताई है।
क्योंकि लोगों को एक से अधिक राशन कार्ड उपलब्ध कराकर पीडीएस होल्डर मार्केट रेट पर केरोसीन और राशन की अवैध सप्लाई करते होंगे। हालांकि यह अभी जांच का मामला है कि यह क्षेत्रीय डीलरों की करतूत है या इसमें कुछ बड़े अधिकारी व नेता भी शामिल हैं।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री श्याम रजक का कहना है कि अकेले पूर्वी चम्पारण में ही एक लाख से ज्यादा फर्जी राशन कार्ड निकले हैं।
इसके अलावा करीब 92 हजार फर्जी राशन कार्ड समस्तीपुर से, करीब 50 हजार मधुबनी से और करीब 60 हजार राशन कार्ड मुजफ्फरपुर से पकड़े गए हैं।
मंत्री ने कहा है कि सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है और जल्द ही मामले की जांच कराई जाएगी।
वहीं केंद्रीय खाद्यमंत्री रामविलास पासवान ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह समय पर राशन दे रहे हैं जिसे राज्य सरकार समय पर नहीं उठाती जिससे लोगों को टाइम पर राशन नहीं मिल पा रहा है।