देश के अन्य राज्यों की तुलना में बिहार के मुजफ्फरपुर में लीची सबसे अधिक की खेती की जाती है, लेकिन इस साल आशंका है कि लीची का उत्पादन कम हो। दरअसल, लीची की खेती करने वाले किसानों को उनके फसल पर मौसम की मार का डर है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में इस वर्ष खराब लीची की फसल से किसानों को परेशानी में लाकर खड़ा कर दिया है। जिले में लीची की खेती करने वालों को इस मौसम में बंपर फसल की उम्मीद थी, लेकिन मौसम का मिजाज देखते हुए उन्हें आशंका है कि इस बार लीची की कम उपज होगी। उन्हें इस बात का भी डर है कि फसल की कमी के चलते देशभर में इस फल की कमी पड़ सकती है।
एक किसान रितेश कुमार ने कहा, ‘पिछले साल हमें लॉकडाउन और प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ा, जिसके कारण फसल खराब हो गई और हमें भारी नुकसान हुआ। लीची किसान बहुत परेशानी में हैं।’ एक अन्य किसान धर्मेंद्र साहनी ने कहा, ‘पिछले साल लॉकडाउन के कारण हमें भारी नुकसान हुआ था और इस साल मौसम उत्पादन में खलल डाल सकता है।' किसानों ने यह भी उल्लेख किया कि यदि सरकार द्वारा क्षतिग्रस्त फसलों के लिए कुछ सब्सिडी या मुआवजा राशि का प्रावधान होता तो यह बेहतर होता।
मुजफ्फरपुर लीची अनुसंधान के डायरेक्टर डॉ. एसडी पांडे ने कहा कि किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। हर साल की तुलना में इस साल लीची की फसल पर बौर कम जरूर है लेकिन मौसम की वजह से फसल को कोई भी नुकसान नहीं होगा। बौर कम होने के चलते लीची की उपज कम होने की समस्या भी कुछ खास इलाकों में ही है। किसानों को डर है कि जिन इलाकों में लीची की फसल पर बौर कम है, वह लोग अपनी फसल से होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे करेंगे। एक तो पहले से ही फसल कम है वहीं अगर आंधी, तूफान और ओले जैसी मौसमी परेशानियां झेलनी पड़ीं तो किसान पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा।