कटाव से लोग परेशान हैं।
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बीपी मंडल सेतु भी बना है अभिशाप
कोसी और बागमती नदी पर बने बीपी मंडल सेतु (डुमरी पुल) भी इन इलाकों के लिए अभिशाप बना है। यह पुल एक तरफ जहां लोगों के लिए सुख सुविधा का साधन बना है। वहीं ये पुल बेलदौर प्रखंड के तेलीहार, डुमरी, बलैठा, इतमादि एवं गोगरी प्रखंड के सहरौन और बिरबास के लिए प्रत्येक वर्ष मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। बताया जा रहा कि सालाें पहले सोनवर्षा घाट के समीप जिंदा बागमती नदी को सील कर उसकी बहाव धारा को बदल दिया गया था। इसके कारण कोसी में पानी का बहाव तीव्र होता गया। जानकारों का कहना है अगर बागमती की प्राकृतिक धारा से छेड़छाड़ नहीं किया जाता तो आज सैकड़ों लोगों के आशियाने नहीं उजड़ते।
सालाना 50 लाख खर्च के बाद भी स्थिति भयावह
विभाग की मानें तो खगड़िया में कोसी नदी और बागवती नदी के कटाव की रोकथाम के लिए प्रत्येक वर्ष करीब 50 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। बावजूद कटाव की स्थिति जस की तस बनी हुई है। कोसी कटाव के रोकथाम को लेकर हर वर्ष कटाव निरोधात्मक कार्य या फिर फ्लड फाइटिंग के नाम पर सरकारी रकम खर्च करना ढाक के तीन पात साबित हो रहा है। बाढ़ प्रमंडल-2 के जूनियर इंजीनियर मनिकांत पटेल बताते हैं कि कटाव निरोधक कार्य तेजी से किया जा रहा है। पचाठ, मुनिटोला, गाँधी नगर और इत्मादी में कटाव हो रहा है। जिसपर विभाग नजर बनाए हुए है। इधर जानकारों की माने तो जबतक इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है तबतक इन इलाकों के लोग ऐसे ही बेघर होते रहेंगे।