बिहार के मुजफ्फरपुर में इंसेफ्लाइटिस से बच्चों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकडों के मुताबिक अभी तक 38 बच्चों की मौत हो गई है जबकि गैर सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 50 जानें अभी तक चली गई हैं।
बिहार से लेकर दिल्ली तक मौत की खामोश चीखें सुनाई दे रही हैं, अफसरों और नेताओं में हडकंप है, बच्चों के मां बाप डरे हुए हैं लेकिन हर बीतता हुआ दिन दो-चार जानें लील ही जाता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री कोशिशें कर रहे हैं, राज्य भर के अधिकारी और नेता भी जुटे हैं लेकिन नतीजे सिफर। अस्पतालों में मां बाप की गोद में बच्चे दम तोड़ रहे हैं और डॉक्टर कोशिशों के बावजूद भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
आखिर ये कैसी बामारी है जो हर साल सैंकड़ों जानें ले लेती है और कोई कुछ नहीं कर पाता? कैसे इसकी रोकथाम हो? कैसे इसका इलाज हो? और कैसे मासूमों को मौत के मुंह में जाने से रोका जाए?
साल 2013 और साल 2012 में सैंकड़ों बच्चे काल के गाल में समा गए, साल दर साल ऐसा ही हो रहा है लेकिन किसी के पास इस बात का कोई हल नहीं है।