चिराग पासवान और तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)
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भाजपा से बढ़ी दूरी के बीच लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान की विपक्षी महागठबंधन के सीएम पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव से नजदीकियों के संकेत मिल रहे हैं। दोनों नेता जिस प्रकार सीएम नीतीश कुमार पर एक साथ हमला बोल रहे हैं, उससे सियासी गलियारे में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इन कयासों को तब और बल मिला जब भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा नहीं करने की घोषणा करने वाले चिराग ने तेजस्वी की सीट राघोपुर से भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा कर दिया।
सीट बंटवारे पर पेच के दौरान इस रिश्ते की सुगबुगाहट महसूस की गई थी। तब चिराग ने सीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर तेजस्वी यादव को अपना भाई बताते हुए उन्हें शुभकामना दी थी। इसके बाद जब तेजस्वी ने नीतीश को चुनाव लड़ने की चुनौती दी तो चिराग ने तेजस्वी का साथ दिया। उन्होंने कहा कि सीएम को तेजस्वी की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए।
इस घटना से बढ़ी सरगर्मी
चिराग ने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की थी कि लोजपा भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी, मगर लोजपा ने राघोपुर में भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार उतारा। इसी सीट पर तेजस्वी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि लोजपा के उम्मीदवार के कारण तेजस्वी की राह आसान होगी क्योंकि राजग के वोटों में बंटवारा होगा। इसके अतिरिक्त इस सीट पर दलित बिरादरी राजद के खिलाफ रही है। लोजपा के ताल ठोकने के बाद उसे इस बिरादरी का भी वोट मिलेगा।
तेजस्वी को चिराग का समर्थन
अब तक सिर्फ चिराग ने ही तेजस्वी के लिए सकारात्मक संदेश दिए थे। हालांकि सोमवार को तेजस्वी ने पहली बार चिराग का समर्थन किया। चिराग ने अपने पिता रामविलास पासवान की अंतिम क्रिया के दौरान नीतीश पर खुद को अपमानित करने का आरोप लगाया। इस पर तेजस्वी ने भी उनका साथ देते हुए कहा कि नीतीश ने चिराग के साथ अन्याय किया है। तेजस्वी ने चिराग के दुख को बड़ा बताया और कहा कि इस समय उनको अपने पिता की जरूरत थी। क्या राजग में अलग-थलग पड़े लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान की विपक्षी महागठबंधन के सीएम पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव से नजदीकियां बढ़ रही हैं?
आगे की सियासत की तैयारी में चिराग
सवाल यह है कि राजद से नजदीकियां बढ़ा कर चिराग चुनाव के बाद की सियासत की तैयारी कर रहे हैं। अगर राजग सत्ता में लौटी तो लोजपा के लिए राजग में बने रहना आसान नहीं होगा। इसके अलावा इस जुगलबंदी से यह भी संदेश गया है कि लोजपा चुनाव के बाद परिस्थिति के अनुरूप राजग की जगह महागठबंधन को भी विकल्प के रूप में आजमा सकता है। इसके अलावा इसकी भी संभावना है कि ऐसे बयानों के जरिए चिराग खुद के लिए दलित मतदाताओं में सहानुभूति का माहौल तैयार करने की कोशिश में हैं।