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Bihar Election 2020: 'पीएम मोदी से बैर नहीं, सीएम नीतीश की खैर नहीं' नारे से लगे तेजस्वी की उम्मीदों को पंख

Tue, 13 Oct 2020 08:11 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कांग्रेस, वामदल जनता की नाराजगी भुनाने में जुटे
  • लोजपा लीडर चिराग का दांव दे सकता है जद(यू) को 'घाव'
  • प्रशांत किशोर की सलाह पर चिराग बना रहे हैं सत्ता का समीकरण
  • नीतीश का साथ पाने के लिए भाजपा ने अपने नेताओं को किया निलंबित
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नीतीश कुमार और चिराग पासवान - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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बिहार चुनाव से एक महीने पहले जो राष्ट्रीय जनता दल और उसके नेता तेजस्वी यादव बेदम नजर आ रहे थे, अब उनमें कुछ जान दिखाई देने लगी है। प्रशांत किशोर की सलाह पर बिहार में बड़ा दांव लगाने के मकसद से अकेले चुनाव में उतरने का निर्णय करने वाले चिराग पासवान ने बड़ा राजनीतिक तड़का लगाया है। इससे जहां भाजपा के पक्ष में तेजी से समीकरण बदल रहा है, वहीं जद(यू) के नेता नीतीश कुमार की चुनौती बढ़ रही है। नीतीश ने सहयोगी दल भाजपा पर दबाव डालकर उसके बागी नेताओं को पार्टी से निलंबित कराया है। भाजपा नेताओं को इसमें राजस्थान विधानसभा चुनाव की तरह 'पीएम मोदी तुझसे बैर नहीं, नीतीश कुमार की खैर नहीं' का अक्स दिखाई दे रहा है।

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बागी बने मुसीबत

सबसे ज्यादा बागी उम्मीदवार भाजपा से हैं। भाजपा के नेता पार्टी छोड़कर लोजपा को पहली पसंद मानकर उसके टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं। जद(यू) के दबाव में भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा से किनारा करने की घोषणा की है। लेकिन इसके बाद भी भाजपा के बागी जद(यू) के लिए लगातार चिंता का कारण बने हैं। बताते हैं यह रणनीति भी चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार और कभी नीतीश कुमार की आंख के तारे रहे प्रशांत किशोर की सलाह पर तैयार हुआ है। उत्तर प्रदेश से प्रचार करने गए संघ और भाजपा नेताओं को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। अंदरखाने की खबर यह भी है कि बिहार के कई भाजपा सांसद इससे खुश हैं। हालांकि कांग्रेस, भाजपा, राजद, जद(यू) के नेताओं का मानना है कि इससे लोजपा को खास फायदा नहीं होने वाला है। राजद, कांग्रेस और भाजपा के नेताओं का मानना है कि इससे सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को और इसके बाद राजद को मिलेगा। प्रयाग से भाजपा का प्रचार करने गए काशी प्रांत के नेता का कहना है कि चुनाव बाद नंबर वन भाजपा, नंबर दो पर राजद और नंबर तीन पर जद(यू) रह सकती है।

2005 जैसा उलटफेर संभव है

बिहार चुनाव को समझने वाले नेताओं, पत्रकारों, चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में 2005 के विधानसभा चुनाव के नतीजों जैसा फेरबदल संभव है। त्रिशंकु विधानसभा की संभावना को भी इंकार नहीं किया जा सकता। तब पासवान की लोजपा, कांग्रेस और राजद ने अलग चुनाव लड़ा था। चुनाव में जद(यू) को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं और भाजपा के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने सरकार बनाई थी। 2005 के विधानसभा चुनाव में लोजपा के तत्कालीन प्रमुख रामविलास पासवान ने लालू प्रसाद यादव के सपने पर पानी फेर दिया था। 2009 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला करके राजद को झटका दे दिया था। 2020 के विधानसभा चुनाव में जद(यू) के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करके चिराग पासवान भी उसे झटका देने की तैयारी कर चुके हैं। चिराग भाजपा के साथ हैं, जद(यू) के खिलाफ हैं। इससे परोक्ष लाभ राजद, कांग्रेस और वामदलों के गठबंधन को मिल सकता है। बताते हैं जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और 'सन ऑफ मल्लाह' मुकेश साहनी की वीआईपी के एनडीए में जाने से होने वाला नुकसान अब संतुलित हो गया है।

तेजस्वी का एमवाई समीकरण तो कांग्रेस को भी लाभ की उम्मीद

राजद के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव शुरू से मुसलमान, यादव समीकरण को साध रहे हैं। ठेठ बिहारी, लालू प्रसाद यादव के सामाजिक समीकरण का नारा देकर तेजस्वी की उम्मीद अन्य पिछड़ा वर्ग, दलित, पिछड़े-कुचले समाज पर भी टिकी है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने तारिक अनवर, शकील अहमद समेत अन्य को महत्वपूर्ण जिमेमदारी देकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। तालमेल बनाने के लिए मोहन प्रकाश जैसे समाजवादी पृष्ठभूमि से आए पार्टी के बड़े नेता को उतारा है। बिहार के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल के लिए यह चुनाव अहम है और रणदीप सुरजेवाला को बिहार में कैंप करने के लिए कहा गया है। पार्टी ने अपने युवा नेता संजीव सिंह के कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी डाली है। वाम दलों का साथ मिलने के बाद कांग्रेस को भी लग रहा है कि 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव दिलचस्प होगा।
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नीतीश बनाम तेजस्वी की छवि पर होगा विधानसभा चुनाव

दो युवा बिहारी अस्मिता के मुद्दे पर चुनाव का शंखनाद कर रहे हैं। एक हैं लोजपा के चिराग। नारा है-बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट। दिवंगत रामविलास पासवान के बाद सहानुभूति वोट मिलने की उम्मीद है। दूसरे हैं ठेठ बिहारी तेजस्वी यादव। नारा है-ठेठ बिहारी, करो तैयारी। लेकिन बिहार के कभी सुशासन बाबू के नाम से मशहूर हुए 15 साल से सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बड़ा बिहार में कोई चेहरा नहीं है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव जेल में हैं। उनके भाषणों, स्टाइल और क्रिया कलाप की सीडी राजद के नेता पूरे बिहार में चलवा रहे हैं।

वहीं नीतीश कुमार लालू के शासन की याद दिला रहे हैं। इस तरह से मुख्य मुकाबला चेहरे के तौर पर नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच में होना है। सरकार विरोधी लहर भी है और यह नीतीश कुमार के खिलाफ है। लेकिन दोनों के बीच में सबसे अलहदा चेहरा लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है। वह लोकप्रियता के शिखर पर चल रहे हैं। भाजपा को इसी चेहरे की पूरी उम्मीद है।
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