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जनसंख्या नियंत्रण: नीतीश के बयान से सहमत नहीं डिप्टी सीएम, रेणु देवी बोलीं- महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को करना होगा जागरूक

Tue, 13 Jul 2021 08:01 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री रेणु देवी आमने-सामने हैं। रेणु देवी का बयान नीतीश कुमार के महिलाओं को जागरूक करने पर जोर देने के बाद आया। मुख्यमंत्री ने कहा था कि सिर्फ कानून बना देने से कुछ नहीं होता है। 
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बिहार की डिप्टी सीएम रेणु देवी - फोटो : ANI
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जनसंख्या नीति पेश करने के बाद देशभर में एक नई बहस छिड़ गई है। बिहार में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री रेणु देवी आमने-सामने हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से जनसंख्या नियंत्रण को लेकर उठाए गए कदम को लेकर जब नीतीश कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए सिर्फ कानून बनाने से आबादी नियंत्रित हो जाएगी यह संभव नहीं है। इसके लिए महिलाओं का शिक्षित होना ज्यादा जरूरी है। नीतीश कुमार के बयान से इतर उप मुख्यमंत्री रेणु देवी ने कहा कि इसके लिए पुरुष को जागरूक होने की जरूरत है। पुरुषों के अंदर जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए नसबंदी को लेकर भी काफी डर की स्थिति है।

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नीतीश ने महिलाओं को जागरूक करने की कही थी बात
बता दें कि जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर नीतीश कुमार ने कहा था कि जो राज्य जो करना चाहे करें, लेकिन हमारा मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए केवल कानून बनाकर उपाय करेंगे तो यह ठीक से संभव नहीं हो सकता । अगर महिलाएं पढ़ी लिखी होंगी तो उनके अंदर ज्यादा जागृति होगी और प्रजनन दर अपने आप घटेगी, लेकिन उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता रेणु देवी नीतीश कुमार के इस विचार से सहमत नहीं हैं। रेणु देवी ने कहा कि केवल महिलाओं के शिक्षित होने से ही जनसंख्या नियंत्रण संभव नहीं है। 

नसबंदी से डरते हैं पुरुष- डिप्टी सीएम
लिखित बयान में उप मुख्यमंत्री रेणु देवी ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पुरुषों के अंदर जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए नसबंदी को लेकर भी काफी भय है। नसबंदी के नाम पर पुरुष डरते हैं।
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परिवार का आकार होता बड़ा - डिप्टी सीएम
रेणु देवी ने कहा कि नसबंदी से पुरुष कितने डरते हैं इसका अंदाजा राज्य में नसबंदी दर से ही लगाया जा सकता है। बिहार के कई जिलों में नसबंदी की दर मात्र एक फीसदी है। उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि बेटे की चाहत में पति और ससुराल वाले महिला पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव बनाते हैं जिससे परिवार में सदस्यों की संख्या बढ़ जाती है।

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