जद (यू) के कभी रणनीतिकारों में रहे पूर्व राज्यसभा सदस्य का कहना है कि 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव होना था। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने अहंकार में जद (यू) को एनडीए से अलग कर चुके थे। हालांकि तब पार्टी में नीतीश कुमार की तरह सामानांतर हैसियत रखने वाले शरद यादव को एनडीए छोड़ना नागवार लग रहा था। शिवानंद तिवारी जैसा नेता नीतीश कुमार को लेकर कुछ नहीं कहना चाहते।
लेकिन तब नीतीश कुमार ने अपनी जरूरतों को बड़े करीब से समझा था। वह शरद यादव की सलाह पर जनता दल परिवार को एकजुट करने की मुहिम के लिए तैयार हो गए। राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव, कांग्रेस के साथ गठबंधन करके महागठबंधन करने पर सहमति बन गई। बताते हैं इस महागठबंधन की भूमिका में प्रशांत किशोर की भी बड़ी भूमिका थी।
प्रशांत किशोर और पवन वर्मा को पार्टी से निकालने के बाद प्रवक्ता केसी त्यागी ने सफाई दी है। त्यागी के अनुसार पार्टी का अनुशासन, पार्टी का निर्णय, पार्टी नेतृत्व के प्रति वफादारी ही दल का मूल मंत्र होता है। त्यागी का कहना है कि पवन वर्मा और प्रशांत किशोर को पार्टी यथोचित सम्मान दिया गया, लेकिन पीके ने अपनी स्वेच्छाचारिता को प्राथमिकता में रखकर काम किया। पार्टी नीतियों के विरुद्ध विवादास्पद बयान दिए। अनुशासन और नेतृत्व के प्रति वफादारी को ताक पर रखा। पवन वर्मा ने भी अनुशासनहीनता की।
लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार पटना विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से निकले नेता हैं। 1990 में बिहार विधानसभा में जनता दल को स्पष्ट बहुमत मिला था। लालू प्रसाद यादव राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। तब नीतीश कुमार लालू प्रसाद की आंख का तारा कहे जाते थे। 1994 में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद का साथ छोड़ दिया।
क्रांतिकारी नेता जार्ज फर्नांडीज के समता पार्टी गठित करने के बाद नीतीश कुमार उनके साथ आ गए। समता पार्टी ने भाजपा के साथ मिलकर अपनी राजनीतिक यात्रा को आरंभ किया। नीतीश कुमार की राजनीति बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के विरोध पर टिक गई। शरद यादव ने अपने अलग पार्टी जद (यू) बनाई थी।
बाद में नीतीश कुमार ने शरद यादव से करीबी बढ़ाई। सूत्रधार बने और जार्ज को काफी हद तक नागवार लगने के बाद भी उन्होंने समता पार्टी का जद (यू) में विलय करा दिया। राजनीति के पंडित कहते हैं कि 2009 आते-आते नीतीश कुमार के लिए जार्ज फर्नांडीज बहुत महत्व के नेता नहीं रह गए थे। भाजपा के साथ तालमेल करके जद (यू) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री बनते रहे। 2013 में भाजपा ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को 2014 के प्रचार अभियान का प्रमुख बनाया।
नीतीश कुमार ने इसे भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति की तरफ बढ़ना बताते हुए इस पर एतराज जताया और शरद यादव को काफी हद तक नागवार लगने के बाद भी जद (यू) का भाजपा से नाता तोड़ लिया। 2015 में परिस्थितियों ने करवट बदली तो नीतीश कुमार राजद नेता लालू प्रसाद यादव, कांग्रेस के साथ तालमेल करके महागठबंधन बनाया।
2017 में फिर नीतीश कुमार नाराज हुए। इस बार फिर शरद यादव के विरोध के बाद भी लालू प्रसाद यादव की राजद और महागठबंधन से नाता तोड़ लिया। भाजपा के साथ मिलकर जुलाई 2017 में सरकार बनाई। मुख्यमंत्री बने और शरद यादव को पार्टी से बेदखल करने की कार्रवाई की।