तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं बच पाई रंजन की जान।
- फोटो : अमर उजाला
बिहार में निर्माणाधीन और चालू पुल गिरते रहते हैं। अभी कुछ दिनों पहले भी निर्माणाधीन पुल का बड़ा हिस्सा गंगा में समा गया गया था। बड़ी घटनाओं से अलग सासाराम की यह घटना अजूबा है। 11 साल का बच्चा एक पुल के गैप में जाकर फंस गया। न उसने जीते-जी किसी को कुछ बताया और न किसी ने उसे देखा था कि कैसे फंसा। लेकिन, यह तो तय है कि पुल पर किसी चुहलबाजी में उसका पैर करीब एक फीट चौड़े गैप में गया और फिर वह खुद को संभाल नहीं सका। अंदर जाता गया और ऐसा फंसा कि पैदल गुजरती एक महिला तक उसके रोने की आवाज पहुंची।
गांधी सेतु पर पैर फंसने का खतरा रहता था
पटना-हाजीपुर को जोड़ने वाले पुराने गांधी सेतु पर भारी वाहन गुजरते समय पुल के अलग-अलग स्लैब ऊपर-नीचे होते रहते थे। जिस स्लैब पर भार पड़ता था, वह नीचे जाता था और भार हटते ही वह हिस्सा ऊपर आता था। इस दौरान दोनों स्लैब के बीच बना लोहे के दांतनुमा हिस्से के बीच पैदल चलने वालों का तलवा फंसने का खतरा रहता था। दांतनुमा इए हिस्से के ज्यादा ऊंचा रह जाने के कारण छोटी गाड़ियां कई बार अनियंत्रित भी हुईं। लेकिन, सासाराम में जिस तरह की घटना सामने आई, वैसा बिहार में पहली बार हुआ।
सासाराम में रंजन की यूं गई जान, 40-42 डिग्री तापमान में 24 घंटे शरीर डिहाइड्रेट हुआ
राजेंद्र सेतु पर स्टंट दिखाने वाले गिरे, फंसे नहीं
पटना-बेगूसराय को जोड़ने वाले राजेंद्र सेतु पर नीचे की तरफ रेलवे ट्रैक है और ऊपर सड़क मार्ग। सड़क मार्ग के दोनों तरफ फुटपाथ है। वाहन मार्ग और फुटपाथ के बीच गैप है, लेकिन यह फंसने वाला नहीं है। कोई इस गैप के बीच से कूदकर जाए तो एक-दूसरी तरफ आ-जा सकता है, लेकिन इतना खतरा उठाने के चक्कर में सीधे गंगा नदी में गिरने की आशंका रहती है। सड़क मार्ग के नीचे रेलवे ट्रैक पर भी इसी तरह का खतरा है। इसी खतरे के बीच ट्रेन की सीढ़ियों पर यात्रा करते हुए मोबाइल पर बात करने वालों से छिनतई की घटना हो चुकी है। छिनतई में हादसे भी हुए हैं। लेकिन, इस तरह फंसने वाला कोई मामला नहीं हुआ।
तो, अब पैदल चलते समय रखना होगा ध्यान
सासाराम की घटना कैसे हुई, यह जान लेंगे तो कभी पैदल चलते समय बच्चों को लेकर लापरवाही नहीं होगी। बच्चा पुल के सड़क मार्ग पर चलते हुए नहीं फंसा, बल्कि किनारे वाले हिस्से में गैप के बीच छिपने, खेलने या गलती से पैर पड़ने पर अनियंत्रित होकर गिर गया। चूंकि बच्चे ने खुद कुछ नहीं बताया या कोई चश्मदीद नहीं, इसलिए 'अमर उजाला’ यह तीन तरह की आशंका सामने ला रहा है। मतलब साफ है कि पुल पर चलने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन अगर आपके साथ बच्चे पैदल चल रहे हों या बच्चे पुल पर जाने के आदी हों तो यह ध्यान रखना ही होगा कि वह किनारे की तरफ न जाएं। यहां एक फीट तक का गैप होता है, जिसमें बच्चे गिर सकते हैं। गिरने के बाद उनका निकलना किस तरह असंभव है और निकालने वाला सिस्टम कितना धीमा, यह गुरुवार को सासाराम के रेस्क्यू ऑपरेशन के अंत ने दिखा दिया है।