कई इलाकों में यह पोस्टर चिपकाए गए, हालांकि पुलिस के हाथ नहीं लगे।
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पर्चे में नेता समेत जदयू दफ्तर उड़ाने की धमकी
लाल रंग से दूसरे पाराग्राफ में गोह के पूर्व विधायक रणविजय सिंह को हत्या की धमकी दी गई है। लिखा गया है- "पूर्व विधायक गोह रणविजय सिंह आपका वही हाल किया जाएगा, जो पिसाय सुशील पांडेय का किया गया, जिसका शव आज भी गरीब किसान के खेत की उपज बढ़ा रहा है। पोस्टर में पूर्व विधायक के बारे में आगे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा गया है कि गोह चौक पर आप सामंतवादी सोच और रंगदारीपूर्वक जो बैठते है, वहीं पार्टी कार्यालय एवं तुमको उड़ा दिया जाएगा। अपना सोच बदलो। मार्क्सवाद कभी खत्म नहीं होता। हमारे सभी कामरेड जो जेल में बंद या बाहर हैं, सभी तुम्हारी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। कभी भी तुम्हारा विचारधारा बदला जा सकता है।"
MLA और MP को पहले से मिली है सुरक्षा
पहले भी पूर्व विधायक रणविजय कुमार की हत्या करने की धमकी देते हुए नक्सलियों ने कई बार पोस्टर चिपका चुके हैं। इसी कारण राज्य सरकार ने पूर्व विधायक व उनके गांव की सुरक्षा को लेकर बंदेया में थाना भी स्थापित कर दिया है और राज्य सरकार ने उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा दे रखी है। वहीं, सांसद सुशील कुमार सिंह के खिलाफ भी नक्सली पूर्व में पोस्टरबाजी कर चुके हैं। नक्सलियों के टारगेट पर रहने के कारण ही सांसद को केंद्र सरकार की ओर से सीआरपीएफ की सुरक्षा हासिल है। इसके बावजूद एक बार फिर से नक्सलियों ने पोस्टर चिपकाकर इस तरह की धमकी दी है।
पुलिस पुष्टि कर रही, मगर पर्चे हाथ नहीं लगे
गोह थानाध्यक्ष कमलेश पासवान ने कहा कि पूर्व विधायक से भी इसकी सूचना मिली है और पेमा एवं डिहुरी गांव के लोगों ने भी जानकारी दी है। पुलिस के मौके पर पहुंचने के पहले ही वहां से पोस्टर हटा लिए गए। बंदेया के प्रभारी थानाध्यक्ष अरविंद सिंह ने भी पोस्टर चिपकाने की पुष्टि की, लेकिन यहां पर्चे के सिर्फ निशान मिले।
पोस्टर से क्या याद दिला रहे माओवादी
पूर्व विधायक को धमकी देने के क्रम में जिस हत्या का जिक्र है, उसे 2013 में नक्सलियों ने अंजाम दिया था। अक्टूबर 2013 में नक्सलियों ने लैंडमाइंस बिछाकर वाहन को उड़ा दिया था, जिससे सुशील पांडेय समेत वाहन पर सवार दर्जनभर लोगों की मौत हो गई थी। उनकी लाश तक के चीथड़े उड़ गए थे।
पूर्व विधायक और सांसद की प्रतिक्रिया
डॉ. रणविजय कुमार ने कहा कि नक्सली मृतप्राय हो चुके हैं। सरकार के विकास, सीआरपीएफ और कोबरा के प्रहार से इनकी कहानी खत्म हो चुकी है। 42 साल से इनसे लड़ाई लड़ रहा हूं। इनकी चुनौती कबूल है। वहीं, सांसद सुशील कुमार सिंह ने कहा कि मैं तो जनता की सेवा के प्रति संकल्पित हूं। जनता की सेवा में मेरी जान लेने से नहर आ जाती है तो मैं अपनी जान देने को भी तैयार हूं। मैं तो 24 घंटे अपनी जान हथेली पर लेकर ही चलता हूं।