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Bihar News: मोतिहारी में कृषि उपकरण सब्सिडी घोटाला, किसानों को डीबीटी का झांसा देकर दुकानदार ले रहे पूरी रकम

Sun, 25 Aug 2024 01:18 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी

सार

नियम के अनुसार कृषि विभाग अनुदान (सब्सिडी) की राशि क्रेता को नहीं देता है। खरीदे गए यंत्र पर दी गई सब्सिडी का भुगतान कृषि विभाग की ओर से संबंधित यंत्र निर्माता के खाते में किया जाता है, जिसके बाद यह राशि रिटेलर को भेज दी जाती है। 
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किसान से ले ली थ्रेशर की पूरी कीमत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मोतिहारी में कृषि उपकरण खरीदने वाले किसान सब्सिडी पाने के लिए भटक रहे हैं, जबकि रिटेलर मालामाल हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि कृषि उपकरण सब्सिडी घोटाला में एक बड़ा रैकेट शामिल है, जो कृषि अधिकारियों को मैनेज करता है। इसके बाद प्रत्येक किसान मेले के दौरान सब्सिडी के करोड़ों रुपये की हेराफेरी होती है। पूरे साल कृषि उपकरणों की खरीद पर मिलने वाली सब्सिडी का बड़ा हिस्सा बंदरबांट का शिकार होता है। जागरूक किसान इसका लाभ ले लेते हैं, जबकि कई सब्सिडी की राशि के लिए अपने खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) का इंतजार करते-करते थक जाते हैं और हार मान लेते हैं।

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किसान को बताया खाते में आएंगे रुपये
दरअसल, कृषि उपकरणों की खरीद पर सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी से रिटेलर्स और अधिकारियों की चांदी कट रही है। इसका खुलासा तब हुआ जब रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के चंपापुर के एक किसान ज्याऊल अंसारी ने थ्रेशर खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी के लिए कृषि कार्यालय के चक्कर लगाए। लेकिन, रिटेलर ने अंसारी से थ्रेशर के अनुदान समेत पूरे दो लाख रुपये वसूल लिए थे, जबकि इसमें एक लाख रुपये की सब्सिडी थी। नियम के अनुसार किसान से सब्सिडी को छोड़कर केवल एक लाख रुपये ही जमा कराए जाने थे, लेकिन रिटेलर ने पूरे दो लाख रुपये जमा कराए। साथ ही थ्रेशर खरीदने वाले किसान अंसारी को बताया कि अनुदान की राशि कृषि विभाग आपके खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) कर देगा।

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सब्सिडी को लेकर क्या है नियम?  
नियम के अनुसार कृषि विभाग अनुदान (सब्सिडी) की राशि क्रेता को नहीं देता है। खरीदे गए यंत्र पर दी गई सब्सिडी का भुगतान कृषि विभाग की ओर से संबंधित यंत्र निर्माता के खाते में किया जाता है, जिसके बाद यह राशि रिटेलर को भेज दी जाती है। ऐसे में रिटेलर को क्रेता से उपकरण खरीद के दौरान सब्सिडी की राशि नहीं लेनी चाहिए। अगर, दो लाख रुपये के उपकरण में एक लाख की सब्सिडी है तो किसान कृषि विभाग से मिले डिलीवरी ऑर्डर की स्लिप लेकर दुकानदार के पास जाएगा और उसे सब्सिडी छोड़कर केवल एक लाख रुपये का ही भुगतान करेगा। लेकिन, यहां किसान से पूरी राशि जमा करवा ली जाती है और उन्हें झांसा दिया जाता है कि सब्सिडी की राशि कृषि विभाग द्वारा किसान के खाते में भेज दी जाएगी। लेकिन, हकीकत में ऐसा कुछ नहीं होता है।  

रिटेलर ने किया धोखा
किसान ज्याऊल अंसारी ने बताया कि रिटेलर ने उनके साथ भी यही धोखा किया है। उन्होंने रक्सौल स्थित एक कृषि उपकरण विक्रेता से थ्रेशर खरीदा था, रिटेलर ने उनसे थ्रेशर के पूरे रुपये जमा करा लिए और बताया कि सब्सिडी की राशि क्रेता के खाते में सरकार डीबीटी करेगी। रुपये खाते में नहीं आने पर अंसारी ने कृषि कार्यालय जाकर जानकारी जुटाई तो उन्हें पता चला कि सब्सिडी की राशि भेज गई है। आश्चर्य की बात तो यह है कि क्रेता को झांसा में डालने के लिए उसके आधारकार्ड, पासबुक की छाया प्रति भी जमा करा ली जाती है और बताया जाता है कि अनुदान की राशि देर सबेर खाते में आती है। ऐसे में अधिकांश ग्राहक सब्सिडी का इंतजार कर थक हार कर बैठ जाते हैं। लेकिन, अंसारी की जागरुकता की वहज से एक बड़ा घोटाला  सामाने आया है। लोगों का कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारी और रिटेलर मिलकर किसानों की सब्सिडी हड़प रहे हैं। 
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कार्रवाई की जा रही है 
अमर उजाला की टीम ने इस मामले में प्रखंड कृषि पदाधिकारी देवेंद्र सिंह से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। इसकी जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह मामला उनके रामगढ़वा में पदस्थापन के पहले का है, लेकिन अब उनके संज्ञान में आया है, उचित कार्रवाई की जा रही है।

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