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बिहार में अब अपनी नैया पार मान रही भाजपा, क्यों?

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बिहार के चुनावी परिणाम बेशक 8 नवंबर को आएंगे। लेकिन दोनों ही गठबंधनों के आला नेता और रणनीतिकार परिणाम के गणित की माथापच्ची में जुटे हुए हैं। सूबे के चुनाव प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा से जुडे़ होने के वजह से भाजपा में परिणाम को लेकर माथापच्ची कुछ ज्यादा है।
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तमाम शंका-प्रतिशंका के बीच बिहार की जंग में भाजपा अपनी नैया पार मान रही है। लेकिन सीटों के उलझन को लेकर संघ की बैठक से लेकर पूरे भाजपाई गलियारे में नेता गणित निकालते देखे जा रहे हैं।

चार चरणों के चुनाव के बाद सीटों के गणित की माथापच्ची में जुटे भाजपा रणनीतिकारों को पूरा भरोसा है कि वे सरकार बनाने के जादूई आंकडे के करीब सीटें जीत लेंगे। रांची में संपन्न संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में भी भाजपा नेताओं ने अपनी रिपोटिंग में जीत का दावा किया है।
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साथ ही संघ ने अपने आकलन में भी पाया है कि सूबे में पहली दफा भाजपा की अपनी सरकार बनती दिख रही है।
बीते चार चरण के तहत 188 सीटों पर हुए चुनाव परिणाम का गणित निकाल रहे पार्टी के शीर्ष नेता और रणनीतिकार बदत्तर परिणाम में भी 108 सीटें राजग के खाते में मान रहे हैं।
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महागठबंधन भी कर रहा 130-135 सीटों की उम्‍मीद

पांचवे चरण के तहत बुधवार को हो रहे 55 सीटों में से 20 से 25 पर वे अपनी जीत निश्चित मान रहे हैं। चार चरणों के 108 और पांचवे चरण से 20 से 25 सीटें मिलने की उम्मीद के साथ भाजपा को बिहार की जंग में 128 से 135 सीटें मिलने की पूरी उम्मीद है।

पार्टी रणनीतिकार अपने खुद के आकलन में पहले दो चरणों में महागठबंधन को बढ़त मान रहे हैं। जबकि तीसरा और चौथा चरण भाजपा का रहा है। उधर महागठबंधन के आकलन की सूई भी इसी के इर्द-गिर्द अटकती दिख रही है।

चौथे चरण के बाद सूबे के परिणाम के आकलन में जदयू के वरिष्ठ नेताओं का गणित भी महागठबंधन को 130 से 135 सीटें मिलने की उम्मीद जगा रहा है।

जदयू रणनीतिकार औपचारिक रूप से बेशक बड़ी जीत का दावा कर रहे हैं। मगर उनके अंदरूनी आकलन में महगठबंधन का गणित बहुमत के आंकडों से चंद सीट ही ऊपर रहेगा।
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