मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल भारतीय जनता पार्टी बिहार प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भी मंत्रिपद पर कायम हैं, तो इसके पीछे बड़ा काम एक आधार हो सकता है। यह बड़ा काम है बिहार में चल रहा भूमि सर्वेक्षण। यह सर्वे दरअसल, जमीन के रिकॉर्ड का मिलान है। सभी जमीन के असल हकदार को अपना दावा दाखिल करना है, ताकि आगे जमीन का कोई विवाद नहीं रहे। यह काम 2020 में शुरू हुआ था, लेकिन अब गति पर आया है क्योंकि तीन महीने का लक्ष्य देकर इसे पूरा कराया जा रहा है। राज्य में पहला जमीन सर्वेक्षण 1890 में शुरू हुआ था। 1990 में दूसरी बार इसकी शुरुआत हुई। अब भी बिहार में जमीन विवाद में सबसे ज्यादा आपराधिक घटनाएं, खासकर हत्याएं होती हैं। स्वामित्व विवाद का समाधान हो गया तो काफी हद तक यह संकट कम जाएगा। ऐसे में इस ड्रीम प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद से दस तरह की अफवाहों के कारण लोग डरे हुए हैं। सबसे बड़ा खतरा कागज नहीं रहने पर जमीन सरकारी होने का सता रहा है। यह खतरा कितना सही है और कितना गलत, क्या है यह प्रक्रिया, कैसे हो रहा है... ऐसे ढेर सारे सवालों के जवाब यहां दिए गए हैं। अगर इसके बाद भी सवाल रहे तो आप इस खबर के अंत में दिए मैसेज बॉक्स में सवाल दें, जवाब मिलेगा।
क्या है बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण 2024?
लगातार बढ़ते भूमि विवाद पर लगाम लगाने तथा सही व्यक्ति को उसका वाजिब हक दिलाने के उद्देश्य से बिहार में विशेष भूमि सर्वेक्षण का काम कराया जा रहा है।
कैसे अपना दावा करना होगा?
करीब सौ साल के बाद सूबे में फिर से हो रहे भूमि सर्वेक्षण के दौरान बंदोबस्त विभाग द्वारा ऑनलाइन व ऑफलाइन मोड में रैयतों से आवेदन जमा लिए जा रहे हैं। ऑफलाइन मोड में आवेदन जमा करने के लिए सरकार द्वारा अंचल स्तर पर शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में जाकर लोग आवश्यक कागजातों के साथ अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। वहीं जो लोग शिविर में जाने से असमर्थ हैं, वह बिहार सरकार के वेबसाइट dlrs.bihar.gov.in पर जाकर भी सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं।
किन कागजातों की होगी जरूरत?
भूमि सर्वेक्षण में किसी जमीन पर अपने दावे के लिए रैयतों को मुख्य रूप से प्रपत्र-2 व प्रपत्र-3ए भर कर जमा करना है। प्रपत्र-2 में अपनी जमीन से जुड़ी सभी जानकारी जैसे- अपनी जमीन का खाता नंबर, खेसरा, रकबा और चौहदी की जानकारी देनी होगी। वहीं प्रपत्र-3ए वंशावली का फार्मेट है। यह उन रैयतों को भरना होगा, जिन्हें अपनी जमीन पुरखों से मिली है। दोनों प्रपत्रों का फॉर्म आप https://dlrs.bihar.gov.in/ से डाउनलोड कर सकते हैं।
स्वअभिप्रमाणित वंशावली है मान्य?
यूं तो सरकारी स्तर पर किसी कार्य के लिए सरपंच व पंचायत सेवक के हस्ताक्षर से निर्गत वंशावली की जरूरत होती है, लेकिन भूमि सर्वेक्षण के दौरान रैयतों को वंशावली बनवाने के लिए पंचायत सचिव अथवा सरपंच के पास भटकने की जरूरत नहीं है। वह प्रपत्र-3ए में खुद से अपनी वंशावली का ब्योरा भरकर स्व-हस्ताक्षरित करते हुए जमा कर सकते हैं। ग्रामसभा के दौरान बंदोबस्त कर्मी इस वंशावली की जांच अपने स्तर से कर लेंगे।
प्रपत्र-2 व 3ए के साथ और भी कुछ देना है?
ऑनलाइन व ऑफलाइन मोड में आवेदन देने के दौरान रैयतों को प्रपत्र-2 व प्रपत्र-3ए के साथ जमीन से जुड़े कागजात जैसे खतियान, लगान की रसीद, आधार कार्ड व मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना होगा। जिन रैयतों के पास जमीन से संबंधित कोई भी कागजात उपलब्ध नहीं हैं, वह अभिलेखागार से अपनी जमीन के कागजात की नकल प्राप्त कर सकते हैं।
जमीन की दाखिलखारिज का कागज जरूरी है?
यदि किसी व्यक्ति ने खुद कोई जमीन क्रय की है तो उस व्यक्ति को भूमि सर्वेक्षण के दौरान प्रपत्र-3ए भरने की कोई जरूरत नहीं है। यह भी आवश्यक नहीं है कि उक्त व्यक्ति पहले अपनी भूमि का दाखिलखारिज कराए, तभी वह भूमि सर्वेक्षण में भाग ले सकता है। वह दाखिलखारिज के स्थान पर भूमि का केवाला (रजिस्ट्री डीड) भी जमा कर सकता है।