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Bihar Land : बिहार भूमि सर्वेक्षण में केवाला नहीं दिखाया तो जमीन सरकार ले लेगी? कितना वाजिब है डर- समझें

Tue, 03 Sep 2024 04:46 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar Land Survey 2024 EXPLAINER : 2020 में बिहार में भूमि सर्वे का काम शुरू हुआ था, लेकिन अब यह मुहिम में रूप में शुरू हुआ है तो दस तरह की बातें रोज सामने आ रही हैं। ऐसे ही सवालों का जवाब यहां पढ़ें। प्रतिक्रिया में आप कोई और सवाल भी पूछ सकते हैं।
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बिहार में आपकी जमीन है तो सरकारी अफसर दे रहे हैं भूमि सर्वे से जुड़े हर सवाल का जवाब। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल भारतीय जनता पार्टी बिहार प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भी मंत्रिपद पर कायम हैं, तो इसके पीछे बड़ा काम एक आधार हो सकता है। यह बड़ा काम है बिहार में चल रहा भूमि सर्वेक्षण। यह सर्वे दरअसल, जमीन के रिकॉर्ड का मिलान है। सभी जमीन के असल हकदार को अपना दावा दाखिल करना है, ताकि आगे जमीन का कोई विवाद नहीं रहे। यह काम 2020 में शुरू हुआ था, लेकिन अब गति पर आया है क्योंकि तीन महीने का लक्ष्य देकर इसे पूरा कराया जा रहा है। राज्य में पहला जमीन सर्वेक्षण 1890 में शुरू हुआ था। 1990 में दूसरी बार इसकी शुरुआत हुई। अब भी बिहार में जमीन विवाद में सबसे ज्यादा आपराधिक घटनाएं, खासकर हत्याएं होती हैं। स्वामित्व विवाद का समाधान हो गया तो काफी हद तक यह संकट कम जाएगा। ऐसे में इस ड्रीम प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद से दस तरह की अफवाहों के कारण लोग डरे हुए हैं। सबसे बड़ा खतरा कागज नहीं रहने पर जमीन सरकारी होने का सता रहा है। यह खतरा कितना सही है और कितना गलत, क्या है यह प्रक्रिया, कैसे हो रहा है... ऐसे ढेर सारे सवालों के जवाब यहां दिए गए हैं। अगर इसके बाद भी सवाल रहे तो आप इस खबर के अंत में दिए मैसेज बॉक्स में सवाल दें, जवाब मिलेगा।

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क्या है बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण 2024?
लगातार बढ़ते भूमि विवाद पर लगाम लगाने तथा सही व्यक्ति को उसका वाजिब हक दिलाने के उद्देश्य से बिहार में विशेष भूमि सर्वेक्षण का काम कराया जा रहा है।

कैसे अपना दावा करना होगा?
करीब सौ साल के बाद सूबे में फिर से हो रहे भूमि सर्वेक्षण के दौरान बंदोबस्त विभाग द्वारा ऑनलाइन व ऑफलाइन मोड में रैयतों से आवेदन जमा लिए जा रहे हैं। ऑफलाइन मोड में आवेदन जमा करने के लिए सरकार द्वारा अंचल स्तर पर शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में जाकर लोग आवश्यक कागजातों के साथ अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। वहीं जो लोग शिविर में जाने से असमर्थ हैं, वह बिहार सरकार के वेबसाइट dlrs.bihar.gov.in पर जाकर भी सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं।

किन कागजातों की होगी जरूरत?
भूमि सर्वेक्षण में किसी जमीन पर अपने दावे के लिए रैयतों को मुख्य रूप से प्रपत्र-2 व प्रपत्र-3ए भर कर जमा करना है। प्रपत्र-2 में अपनी जमीन से जुड़ी सभी जानकारी जैसे- अपनी जमीन का खाता नंबर, खेसरा, रकबा और चौहदी की जानकारी देनी होगी। वहीं प्रपत्र-3ए वंशावली का फार्मेट है। यह उन रैयतों को भरना होगा, जिन्हें अपनी जमीन पुरखों से मिली है। दोनों प्रपत्रों का फॉर्म आप https://dlrs.bihar.gov.in/ से डाउनलोड कर सकते हैं।
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स्वअभिप्रमाणित वंशावली है मान्य?
यूं तो सरकारी स्तर पर किसी कार्य के लिए सरपंच व पंचायत सेवक के हस्ताक्षर से निर्गत वंशावली की जरूरत होती है, लेकिन भूमि सर्वेक्षण के दौरान रैयतों को वंशावली बनवाने के लिए पंचायत सचिव अथवा सरपंच के पास भटकने की जरूरत नहीं है। वह प्रपत्र-3ए में खुद से अपनी वंशावली का ब्योरा भरकर स्व-हस्ताक्षरित करते हुए जमा कर सकते हैं। ग्रामसभा के दौरान बंदोबस्त कर्मी इस वंशावली की जांच अपने स्तर से कर लेंगे।

प्रपत्र-2 व 3ए के साथ और भी कुछ देना है?
ऑनलाइन व ऑफलाइन मोड में आवेदन देने के दौरान रैयतों को प्रपत्र-2 व प्रपत्र-3ए के साथ जमीन से जुड़े कागजात जैसे खतियान, लगान की रसीद, आधार कार्ड व मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना होगा। जिन रैयतों के पास जमीन से संबंधित कोई भी कागजात उपलब्ध नहीं हैं, वह अभिलेखागार से अपनी जमीन के कागजात की नकल प्राप्त कर सकते हैं।

जमीन की दाखिलखारिज का कागज जरूरी है?
यदि किसी व्यक्ति ने खुद कोई जमीन क्रय की है तो उस व्यक्ति को भूमि सर्वेक्षण के दौरान प्रपत्र-3ए भरने की कोई जरूरत नहीं है। यह भी आवश्यक नहीं है कि उक्त व्यक्ति पहले अपनी भूमि का दाखिलखारिज कराए, तभी वह भूमि सर्वेक्षण में भाग ले सकता है। वह दाखिलखारिज के स्थान पर भूमि का केवाला (रजिस्ट्री डीड) भी जमा कर सकता है।

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बिहार में कैंप लगाकर सर्वे के बारे में जानकारी भी दी जा रही है और कागजात भी लिए जा रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
देना होगा बंटवारा का लिखित प्रूफ?
यदि किसी रैयत को जमीन आपसी बंटवारा के आधार पर मिली है तो उससे संबंधित कागजात उन्हें जमा करना होगा। मौखिक बंटवारा के नाम पर वह किसी जमीन को अपना नहीं बता सकेंगे। बगैर स्टांप पेपर के हुए बंटवारे को अंडरस्टैंडिंग कहा जाएगा, पक्का नहीं।

केवल दावा करने से मिल जाएगा भूमि पर हक?
यदि किसी रैयत की भूमि पर गांव या आसपास के लोगों द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है और भूमि सर्वेक्षण के दौरान वह व्यक्ति अपना दखल-कब्जा जताता है तो केवल यह कहने भर से उसे जमीन का स्वामित्व नहीं दिया जा सकता है। उसे इससे संबंधित कागजात भी पेश करने होंगे कि आखिर किस आधार पर वर्णित भूमि पर उसका दावा बनता है।

गलत दस्तावेज देने पर होगी कार्रवाई?
भूमि सर्वेक्षण के दौरान अगर आप अपने अंचल कार्यालय में जमा किए गए या ऑनलाइन भरे गए प्रपत्र में गलत जानकारी देते हैं और उस दस्वावेज की जांच के दौरान संबंधित अधिकारी दस्तावेज को गलत पाते हैं तो कार्रवाई हो सकती है। इसलिए सभी जमीन मालिकों से सेल्फ एफिडेविट की मांग की गई है।

प्रपत्र-2 और 3ए भर देने के बाद सुधार कर सकते हैं?
भूमि सर्वेक्षण के दौरान प्रपत्र-2 या 3ए भरने पर यदि किसी रैयत से गलती हो जाती है तो गजट प्रकाशन से पहले उन्हें तीन बार सुधार का मौका मिलेगा। अंतिम प्रकाशन के बाद इसमें सुधार नहीं किया जा सकेगा।

‘पुश्तैनी’ का मतलब कितनी पीढ़ियों का माना जाए?
पुश्तैनी संपत्ति पर चार पीढ़ियों का अधिकार होता है। परदादा से मिली संपत्ति पर दादा, पिता और फिर बेटे का अधिकार होता है।

जमीन सर्वे के दौरान सदेह रहना पड़ेगा?
भूमि सर्वेक्षण के लिए अभी कागजात जमा लिए जा रहे हैं। जिन जमीन पर कोई और भी दावा करेगा, उसके सर्वे के दौरान निश्चित तौर पर वह पक्ष मजबूत होगा जो जमीन पर उपलब्ध होगा। इसलिए, जब अमीन आपकी जमीन पर सर्वे करने पहुंचें तो उस समय रैयत को कोशिश करनी चाहिए कि वे अपनी जमीन पर उपस्थित रहें। यदि यह संभव न हो तो किसी ऐसे व्यक्ति को उस स्थान पर जरूर भेज दें, जो आपकी जमीन के बारे में सभी जानकारी रखता हो। ऐसा नहीं होने की स्थिति में यदि कोई पड़ोसी अथवा गांव का व्यक्ति आपकी जमीन के बारे में सर्वेक्षक को गलत जानकारी देत सकता है। इससे आपको भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

केवाला नहीं दिखाया तो जमीन सरकार ले लेगी?
सरकार भले जो कहे, लेकिन अंतिम स्थिति तो यह है ही। अगर आप जमीन पर दावा करते हैं और कागजातों से इसे साबित नहीं कर पाते हैं तो ऐसी स्थिति बन सकती है। हां, केवाला ही इसका सिर्फ प्रमाण नहीं है। बहुत सारे विकल्प हैं आपको अपनी जमीन को अपना बताने के लिए। लेकिन अगर किसी जमीन का कोई कागजाती दावेदारी साबित नहीं हुई तो वह जमीन सरकारी घोषित करने की प्रक्रिया से पहले नोटिस पर जाएगी। दावा मांगा जाएगा। कोई भी उसपर दावा नहीं कर सका या किसी का दावा नहीं साबित हुआ तो अंतत: जमीन बेनामी घोषित होते हुए सरकारी संपत्ति बन जाएगी।

रसीद से काम चल जाएगा?
मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अगर जमीन का ऑनलाइन रसीद कट रहा है, जमीन पर कब्जा है और कोई विवाद नहीं है तो यह रसीद मान्य हो जाएगा।

सहमति आधारित बंटवारे में क्या होगा?
बंटवारा नहीं हुआ है तो जो जिस जमीन पर रह रहे हैं या बेच दी है, अगर आपसी सहमति का कागज बना दिया गया है तो सर्वे में उसी तरह से नाम चढ़ा दिया जाएगा। अगर किसी का टाइटल शूट या कोर्ट में विवाद है तो पहले फेज में इसपर होल्ड रखा जाएगा।
(इनपुट : रंजन सिन्हा, गया)
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