भागलपुर के बरारी पुल घाट पर 20 मई को चलती नाव से गंगा नदी में कूदे युवक का शव शनिवार सुबह बरामद कर लिया गया। शव सबसे पहले एंबुलेंस बनी नाव के नाविक लाल बहादुर मंडल की नजर में आया। इसके बाद उन्होंने तत्काल इसकी सूचना नियंत्रण कक्ष में मौजूद आपदा मित्र अमित कुमार को दी।
आपदा मित्रों ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही आपदा मित्रों ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी। एंबुलेंस नाव से मौके पर पहुंचे आपदा मित्र अमित कुमार ने शव को रस्सी से बांधा और इसकी जानकारी एसडीआरएफ टीम को दी। इसके बाद आपदा मित्र अमित कुमार, तुलसी यादव और सनोज कुमार ने गंगा नदी से रस्सी के सहारे शव को किनारे तक पहुंचाया।
एसडीआरएफ और पुलिस ने संभाला मोर्चा
बाद में एसडीआरएफ टीम की मदद से शव को नदी से बाहर निकाला गया। करीब आधे घंटे बाद बरारी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक ने 20 मई को नाव से गंगा में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के दिन एसडीआरएफ टीम ने काफी देर तक खोजबीन की थी, लेकिन शव बरामद नहीं हो सका था। शनिवार सुबह शव पानी में ऊपर आ गया। युवक ने लोअर और शर्ट पहन रखी थी तथा शव पूरी तरह फूल चुका था।
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विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद नाव बना सहारा
बताया जा रहा है कि 3 मई की रात विक्रमशिला सेतु पुल के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के बाद नवगछिया आने-जाने के लिए नाव ही लोगों का मुख्य सहारा बनी हुई है। रोजाना बड़ी संख्या में यात्री नाव के जरिए गंगा पार कर रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी के लिए घाट पर दर्जनों आपदा मित्र, एसडीआरएफ की टीम और जिला प्रशासन के कर्मी लगातार तैनात हैं।