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Bihar : नीतीश को कल लगने वाला था झटका, आज उससे भी बड़ा सदमा; जदयू अध्यक्ष ललन सिंह को रणवीर नंदन का इस्तीफा

Wed, 27 Sep 2023 12:34 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

JDU Party : 28 सितंबर को जनता दल यूनाईटेड के एक प्रदेश महासचिव ने पार्टी छोड़ भाजपा में जाने का एलान कर रखा था। लेकिन, उससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे पूर्व एमएलसी प्रो. रणवीर नंदन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस्तीफा भेजकर चौंका दिया।
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पूर्व एमएलसी रणवीर नंदन सीएम नीतीश कुमार के साथ। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जनता दल यूनाईटेड (JDU) छोड़ने के लिए नेताओं में खलबली मचने की बात कई बार दूसरे दलों के नेता दुहरा चुके हैं। ताजा बयान राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के विरोध में पार्टी छोड़ने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने दिया कि सभी जुगाड़ लगा रहे हैं। इस बीच, 28 सितंबर को जदयू के एक प्रदेश महासचिव के औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ भारतीय जनता पार्टी में आने के पोस्टर से पटना पटा हुआ था, लेकिन उससे पहले ही पार्टी को जोर का सदमा लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी और पार्टी के अगड़ा चेहरों में से एक पूर्व विधान पार्षद प्रो. रणवीर नंदन ने इस्तीफा दे दिया है।

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कायस्थों को समेटने में प्रो. नंदन की अहम भूमिका रही
प्रो. रणवीर नंदन शिक्षाविद् हैं। जदयू को पटना विश्वविद्यालय में पहली बार छात्र संघ का चुनाव जिताने के लिए रणनीति तैयार करने वालों में प्रो. रणवीर नंदन सबसे आगे रहे। इसके अलावा पटना की राजनीति कायस्थ वोटरों के आसपास घूमती है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए कायस्थों को समेटने में प्रो. नंदन की अहम भूमिका रही। पटना की सीट भले भाजपा के पास जाती रहे, लेकिन जदयू के साथ रहने या अलग रहने की स्थिति में भी रणवीर नंदन के नाम पर पार्टी को कायस्थ सहानुभूति जरूर मिलती थी।

नीतीश जोड़ रहे, ललन तोड़ रहे पार्टी
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प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के हस्ताक्षर से निष्कासन आदेश जारी
प्रो. रणवीर नंदन के इस्तीफे के कुछ घंटे बाद जदयू ने वापसी की संभावना खत्म करते हुए प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के हस्ताक्षर से निष्कासन आदेश जारी किया। इसमें बताया गया है कि पार्टी विरोधी बयानों के कारण प्रो. रणवीर नंदन को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया जा रहा है। इन दोनों पत्रों के बीच 'अमर उजाला' ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के मोबाइल नंबर पर कॉल कर जानना चाहा कि अपमानित किए जाने का आरोप कितना सही है, लेकिन मीडिया का नाम सुनने के बाद उन्होंने कॉल काट दिया। इसके बाद उनसे संपर्क का सारा प्रयास बेकार गया।

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