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Bihar News: चर्चित टेंडर घोटाला केस में BAS अधिकारी पर सम्राट चौधरी सरकार की बड़ी कार्रवाई, जानिए पूरा मामला

Sat, 04 Jul 2026 11:00 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मुमुक्षु कुमार चौधरी निलंबन की अवधि के दौरान सेवा संबंधी सभी अधिकार और दायित्व लागू नियमों के अनुसार संचालित होंगे। सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई न्यायिक और विभागीय जांच की प्रगति के आधार पर तय की जाएगी। फिलहाल उनका निलंबन अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।
 
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पटना सचिवालय - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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बिहार सरकार ने टेंडर घोटाले से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में चल रहे बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के अधिकारी मुमुक्षु कुमार चौधरी को आखिरकार निलंबित कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि उनके खिलाफ रिश्वतखोरी, आय से अधिक संपत्ति, पद का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोपों और न्यायिक हिरासत को देखते हुए सेवा नियमों के तहत यह कार्रवाई की गई है। विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, मुमुक्षु कुमार चौधरी फिलहाल पटना के बेउर केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में बिहार सरकारी सेवक नियमावली के प्रावधानों के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उनका निलंबन कारावास की तिथि से प्रभावी माना जाएगा और अगली अधिसूचना जारी होने तक लागू रहेगा।

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जांच एजेंसियां अब क्या कर रही है?
BAS अधिकारी मुमुक्षु कुमार चौधरी के खिलाफ रिश्वत लेने, आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने और सरकारी पद का कथित रूप से दुरुपयोग करने के आरोपों की जांच चल रही है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने इन आरोपों के आधार पर उनके विरुद्ध नियमित मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन और सरकारी टेंडरों से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही हैं। मामले की सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने 11 जून को मुमुक्षु कुमार चौधरी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। इसके बाद से वह बेउर केंद्रीय कारागार में बंद हैं। जेल में रहने के दौरान ही सामान्य प्रशासन विभाग ने सेवा नियमों के अनुरूप उनके निलंबन की प्रक्रिया पूरी कर दी।
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यह कार्रवाई केवल सरकारी सेवा से संबंधित है
सरकारी आदेश में कहा गया है कि न्यायिक हिरासत में रहने वाले सरकारी अधिकारियों के मामलों में बिहार सरकारी सेवक नियमावली के तहत विभागीय कार्रवाई की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत यह निर्णय लिया गया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल उनकी सरकारी सेवा से संबंधित है, जबकि भ्रष्टाचार के मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अपने स्तर पर जारी रहेगी।

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