बात करने का प्रयास करते ही घूम गईं महिलाएं।
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सवाल पर भी डर से दरवाजे बंद कर ले रहे
वैसे, घरों के बाहर सन्नाटे के पीछे दीवारों के अंदर 'अनाम’ खौफ है। पूछिए कि शांति की उम्मीद है? बोलते हैं- "हम कुछ नहीं बोलेंगे।" इस सवाल पर भी दरवाजे बंद हो जा रहे। कैमरे से हटकर और नाम छिपाकर बोलने वाले भी इतना ही कहते हैं- "अभी बहुत कुछ होने का डर है।" पहले दिन रविवार को पार्किंग विवाद के नाम पर
वर्चस्व की लड़ाई में 43 राउंड फायरिंग में दो की मौत के बाद भीषण आगजनी, दूसरे दिन
घायलों में से एक की मौत के बाद आगजनी के बीच पुलिस से भी झड़प हुई।
श्मशान घाट पर भी मृतक के परिजनों ने डर की ही बात की।
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अंतिम संस्कार में घाट पर भी आशंकाओं की चर्चा
तीसरे दिन उस तीसरे शख्स का अंतिम संस्कार वीरानी के बीच जिस घाट पर हो रहा था, वहां 'अमर उजाला’ ने शांति की उम्मीदों पर बात की तो मृतक के एक-दो परिजनों ने छोटी-सी बात पर दबंगई की पूरी कहानी सुनाई और अब भी आशंकाओं से घिरा बताया। बाकी ने बात तक नहीं की। एक-दूसरे से भी सिर्फ आशंकाओं को लेकर बात कर रहे थे। पुलिस ने गिरफ्तारी का दावा किया है, लेकिन मृतकों के परिजनों को आशंका है कि ऐसा कुछ हुआ नहीं है। अभी हत्यारे बाहर ही हैं और कभी भी कुछ भी कर सकते हैं।
जली गाड़ियों के बीच हर तरफ छायी वीरानी के पीछे कई आशंकाएं अब भी हैं।
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यह आग बुझे...इसपर भी नहीं बोल रहे
'अमर उजाला' ने घटनास्थल के आसपास 25 से ज्यादा लोगों से बात करने की कोशिश की, लेकिन कोई भी न तो घटना के संबंध में और ना ही इस बारे में बोलने को तैयार हुआ कि बहुत हो गया, यह आग अब ठंडी हो जानी चाहिए। इस आग में एक पक्ष की जानों का नुकसान हुआ है तो दूसरे पक्ष के माल का। आग पड़ोसियों तक भी पहुंची और दूर-दूर तक वास्ता नहीं रखने वालों की भी।
जेठुली में महिलाएं ही कहीं दिख रहीं और वह भी इसी तरह रोती हुईं।
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टारगेट पर आने का डर हरेक के अंदर
कोई दियारा से आकर बसे लोगों और पुराने बाशिंदों के बीच अदावत की वजह पर चर्चा नहीं कर रहा। कोई जमीन या राजनीतिक वर्चस्व को लेकर भी मुंह खोलने को तैयार नहीं। कुल मिलाकर पार्किंग का ही नाम लिया जा रहा, लेकिन इस बात पर कोई कुछ नहीं बोल रहा कि आगे क्या होगा? कोई एक लाइन बोलकर पचड़े में नहीं पड़ना चाह रहा कि कहीं वह या उसका परिवार टारगेट पर न आ जाए।
नेशनल हाइवे पर जहां कल-परसों आगजनी थी, उधर से अब भी कुछ गाड़ियां ही गुजर रहीं।
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पुलिस भी डर रही, क्योंकि दो गंभीर हैं
तीन की मौत के बाद अभी जो तीन घायल इलाजरत हैं, उनमें दो की हालत गंभीर है। पुलिस को भी डर है कि उन दो को कुछ हो न जाए। चेनारिक राय, नागेंद्र राय और इस परिवार से जुड़े एक बच्चे की हालत पर सभी की नजर है। बच्चा कुल मिलाकर स्थिर है। चेनारिक राय को चार गोली पेट में लगी है और एक गोली बाएँ हाथ में लगी है। नागेंद्र राय (मृतक रौशन के पिता) को कंधे में गोली लगी है, लेकिन खूब बहुत बह गया है।