एनआईटी उत्तराखंड के दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली दोनों बेटियां देश सेवा का लक्ष्य लेकर चल रही हैं। एक बेटी रेलवे में जाना चाहती हैं, तो दूसरी शोध संस्थान से जुड़कर नए अनुसंधान करना चाहती हैं।
वर्ष 2009-10 बैच की छात्रा अमृता शर्मा ने वर्ष 2014 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से 9.92 सीपीजीपीए हासिल कर संस्थान में टॉप किया था। अमृता बनारस की रहने वाली है। वर्तमान में वह आईआईटी बनारस से पावर इलेक्ट्रानिक में पीएचडी कर रही हैं। अमृता के पिता गोपाल शर्मा भी आईआईटी बनारस में प्रोफेसर हैं, जबकि माता नीलम शर्मा रेलवे कैंसर अस्पताल में रेडिएशन सेफ्टी अफसर हैं।
मेक इन इंडिया कार्यक्रम से प्रभावित अमृता शिक्षण और अनुसंधान में काम करना चाहती हैं। वह कहती हैं कि आगे पोस्ट डॉक्टरल फैलोशिप का विचार है। एनआईटी में पढ़ाई के दौरान आईआईटी और अन्य एनआईटी के शिक्षकों से संपर्क ने उनकी नींव मजबूत की है।
वर्ष 2010-11 बैच की अनुजा सिंह ने वर्ष 2015 में इलेक्ट्रानिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में 9.71 सीजीपीए के साथ टॉप किया था। मूल रूप से बरेली निवासी अनुजा मौजूदा समय में आईईएस (भारतीय अभियांत्रिकी सेवा) की तैयारी कर रही हैं। वह रेलवे में जाना चाहती हैं। उनका मानना है कि रेलवे में भविष्य की दृष्टि से बेहतर अवसर हैं। उनके पिता चंद्रपाल सिंह सहायक अभियंता हैं, जबकि माता चंद्रवती गृहणी हैं।
मेक इन इंडिया में पूरी भागीदारी निभाएं इंजीनियर
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) उत्तराखंड के पहले दीक्षांत समारोह में दो बैच के 50 छात्र-छात्राओं को बीटेक की उपाधि गई। इस मौके पर बैच के टॉपर सहित विभिन्न ट्रेड में उच्चतम सीजीपीए प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को स्वर्ण और रजत पदक से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए मेक इन इंडिया कार्यक्रम में पूर्ण भागीदारी करने का आह्वान किया।
सोमवार को एनआईटी परिसर मे प्रथम दीक्षांत समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि भेल के पूर्व अध्यक्ष के. रवि कुमार, एनआईटी शासकीय मंडल के चेयरमैन भास्कर भट और एनआईटी उत्तराखंड के निदेशक प्रो. एचटी थोराट ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मुख्य अतिथि कुमार ने कहा कि संस्थान के छात्र सही समय पर स्नातक कर रहे हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेक इन इंडिया कार्यक्रम उनको रोजगार के क्षेत्र में नई चुनौतियां देगा। नए विचार औद्योगिक जगत की सफलता की कुंजी है। उन्होंने सफल करिअर के सूत्र बताते हुए कहा कि ऐसा उद्योग चुने, जो नया हो। ऐसी नौकरी चुनो, जो चुनौतियों से भरी हो व कौशल की परीक्षा हो।
अध्यक्षता करते हुए एनआईटी के चेयरमैन भट ने कहा कि बेहतर इंजीनियर बनने के लिए उत्सुकता होनी जरूरी है। कहा कि छात्र-छात्राओं को अंर्तमन से अपने सपनों के बारे में सवाल करने चाहिए। निदेशक प्रो. थोराट ने एनआईटी की उपलब्धियां बताई। अंत में रजिस्ट्रार कर्नल सुखपाल सिंह ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
128 में से 50 आए
दीक्षांत समारोह में 128 छात्र-छात्राओं को उपाधि दी जानी थी, लेकिन कार्यक्रम में 50 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में वर्ष 2009-10 बैच के 62 में से 20 और वर्ष 2010-11 बैच के 66 में से 30 छात्र-छात्राएं पहुंची।
स्थानीय परिधान में छात्राएं
दीक्षांत समारोह के दौरान मंच में सहयोग कर रही छात्राओं ने उत्तराखंड के पारंपरिक परिधान पहन कर अलग पहचान कायम की। एनआईटी सीनेट के सदस्य प्रो. टीसी कांडपाल इससे खासे खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि प्रो. थोराट जब भी कार्यक्रम आयोजित करते हैं, स्थानीय संस्कृति का जरूर ख्याल रखते हैं।
स्वर्ण और रजत पदक से नवाजा
प्रथम दीक्षांत समारोह में वर्ष 2010 बैच की छात्रा अमृता शर्मा और वर्ष 2011 बैच की अनुजा सिंह को स्वर्ण पदक मिला। जबकि वर्ष 2010 के प्रकाश शर्मा को सर्टिफिकेट और वर्ष 2011 बैच की ऋतु पंवार व जयराम मीणा को रजत पदक, शुभम गोयल को सर्टिफिकेट मिला। सर्वोत्तम स्थान प्राप्त करने वाले नमिता कालरा, वर्तिका बिष्ट, विनय वर्मा, अंकित अग्रवाल, रजत गोयल व हरेंद्र सिंह समारोह में नहीं पहुंच पाए।