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राजेंद्र सिंह: 12वीं पास ने बनाया उपकरण, रेडियो पर चलेगा टीवी

Thu, 28 Apr 2016 03:17 PM IST
संदीप बिश्नोई/अमर उजाला, हिसार
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हिसार का अजब-गजब लड़का राजेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
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हुनर को किताबी ज्ञान ही नहीं लग्न और परिश्रम से भी निखारा जा सकता है। ऐसे जुनूनी व्यक्तियों के आगे समस्याएं बोनी हो जाती हैं। यह दिखा दिया है मिरकां गांव के 23 वर्षीय राजेंद्र सिंह ने। 12वीं पास राजेंद्र ने ऐसा उपकरण तैयार किया है, जिससे रेडियो पर  वे सभी चैनल सुन सकते हैं, जो टीवी में देखे जाते हैं। इसके साथ ही इस डिवाइस से रेडियो के अन्य चैनल भी सुने जा सकते हैं। यह उपकरण उन्होंने महज केवल 200 रुपये की लागत में ही तैयार कर दिखाया। गांव के युवाओं में यह मॉडल प्रेरणा का विषय बना हुआ है।
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पढ़ाई का था शौक, पर गरीबी में छोड़नी पड़ी पढ़ाई 
राजेंद्र को बचपन से ही तकनीक से लगाव रहा। नए मॉडल बनाकर स्कूली प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन करना ही उसका शौक बन गया था। हर मॉडल पर उसे तारीफ मिलती और पुरस्कार भी। एक बार सरकार ने भी उसे 5 हजार का इनाम भी दिया, लेकिन कमजोर आर्थिक हालात के चलते राजेंद्र को 12वीं की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इससे उसे बहुत निराशा हुई और टूट सा गया, लेकिन तकनीक के प्रति प्यार और जज्बा कायम रहा। उसी के बूते उसने यह डिवाइस बनाई है। गांव में ही बिजली का छोटा-मोटा काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा है। 

ऐसे बनाया मॉडल
डीटीएच कार्ड के आर्फ में एवी लीड लगाकर लीड को फोन में कनेक्ट कर दिया। फोन को एंटीना के साथ कनेक्ट किया। एंटीना से कनेक्ट होते ही उसमें से तरंगें निकलने लगी। एक रेडियो को पास लाकर ऑन किया तो टीवी के चैनल रेडियो पर चलने लगे। इस दौरान रेडियो की फ्रिक्वेंसी 104.3 थी। 
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200 रुपये आया खर्च
राजेंद्र ने बताया कि यह उपकरण बनाने पर महज 200 रुपये खर्च हुए। डीटीएच कार्ड 150 रुपये और एक एंटीना 50 रुपये में आया। इसके अलावा एक पुराना फोन मामा से लिया था। 

देश के लिए तकनीक खोजना मकसद
राजेंद्र का मकसद है कि वह देश के लिए कोई ऐसी तकनीक ईजाद करे, जिससे दुनिया भारत की तरफ देखे। उसने बताया कि वह अपने हरेक आइडिया को हकीकत में बदलना चाहता है, लेकिन इसके लिए उसे मदद की जरूरत है।

दोस्त करते हैं मदद
राजेंद्र को जब भी कोई नई चीज बनानी हो तो उसके दोस्त ही उसकी मदद करते हैं। वह मॉडल बनाने में पुरानी चीजों का इस्तेमाल करता है, लेकिन जब कभी भी किसी नई चीज की जरूरत होती है तो उसके दोस्त मिलकर ही उसे लाकर देते हैं।
सरकारी स्कूल में पढ़ा, मजबूरी में छोड़ी पढ़ाई

23 वर्षीय राजेंद्र ने बताया कि 10वीं तक की पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल से की, बाद में पढ़ाई छोड़ना उसकी मजबूरी हो गई थी। उसके पिता रामचंद्र को वर्षों से सांस की बीमारी है। मां कमला देवी ने पशुपालन करके ही उसे 12वीं तक पढ़ाया है। इसके बाद पढ़ाई का खर्च निकालना मुश्किल था। मां कमला देवी भी बीमार रहने लगी। इसलिए पढ़ाई छोड़कर घर संभालना उसकी मजबूरी हो गई थी।  

खुद बिजली का काम करता है, घर में नहीं लाइट
 राजेंद्र बेशक खुद बिजली का काम करता हो, लेकिन उसके खुद के घर में बिजली नहीं है। उसके आर्थिक हालात इतने खराब हैं कि वह तीन-चार महीने तक बिजली का बिल नहीं भर पाया, जिसके कारण बिजली निगम के कर्मचारी उसका मीटर भी उखाड़ कर ले गए।
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