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4 बेटियां: श्मशान घाट में की प्रैक्टिस और टीम इंडिया में शामिल

Sun, 24 Apr 2016 07:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी आदमपुर
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हरियाणा की नेशनल जूनियर फुटबाल टीम प्लेयर्स - फोटो : अमर उजाला
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बेटियां जिद पर आएं तो कुछ भी कर सकती है। ऐसा ही कुछ किया, हरियाणा की 4 बेटियों ने, उनका चयन भारतीय जूनियर फुटबॉल टीम के लिए हुआ है। इनमें सदलपुर गांव स्थित समराथल फुटबॉल एकेडमी की प्रोमिला, पूनम, मनीषा और अंजू शामिल है। इन लड़कियों ने जब फुटबॉल खेलना शुरू किया तो इनके सामने सबसे बड़ी समस्या मैदान की थी। मैदान न मिलने पर भी इन लड़कियों ने हार नहीं मानी।
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इन्होंने गांव की श्मशान घाट में ही खेलना शुरू कर दिया। कई दिन तक इन्होंने श्मशान घाट में ही अभ्यास किया। कोच और लड़कियों की लगन देख समराथल स्कूल ने कुछ गांव के लोगों के साथ मिलकर इनके लिए मैदान बनवाया, साथ ही लड़कियों ने खुद चंदा एकत्र कर खेल के मैदान में बाढ़ लगवाई। शुरूआत में इस एकेडमी में कुछ लड़कियां जुड़ी थीं लेकिन धीरे-धीरे ये कारवां बढ़ता गया। अब लगभग 100 लड़कियां इस एकेडमी में प्रशिक्षणा ले रही हैं।

प्रोमिला, पूनम, मनीषा और अंजू तजाकिस्तान में होने वाले एशियन जूनियर फुटबॉल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए रवाना हो गई हैं। इनमें से मनीषा भारत की गोलकीपर होंगी। अंजू और प्रोमिला राईट व पूनम लेफ्ट स्ट्राईकर के रूप में खेलेगी। लड़कियों की इस कामयाबी पर पूरे गांव में जश्न मनाया जा रहा  है। इसी एकेडमी की 7 लड़कियां पूनम, ममता, रेनू बाला, मनीषा, अंजू, प्रोमिला, अंजू बाला, पिछले माह गुजरात के गांधी नगर में भारतीय टीम के चयन शिविर में हिस्सा लेने गई थीं।
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इनकी उपलब्धियां
कोच विनोद कुमार ने बताया कि 2015 में हुई सुप्रोतो नेशनल चैंपियनशिप में पूरी टीम इसी एकेडमी से गई थी। मई 2015 में सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में 7 लड़कियों का चयन हुआ। वर्ष 2015 में आयोजित सुप्रोतो कप की स्टेट चैंपियनशिप में प्रथम स्थान हासिल किया। उन्होंने बताया कि इस एकेडमी की 4 लड़कियां संतोष ट्रॉफी भी खेल चुकी हैं और हाल ही में ओड़िसा में फीफा की ओर से आयोजित सब जूनियर फेडरेशन कप में तृतीय स्थान हासिल किया।

जिद के आगे परिजन भी झुके
इन लड़कियों की जिद के आगे परिजन भी समर्थन में आ गए। ये लड़कियां गांव से दूर खेतों में रहती हैं, जिनकी दूरी 10 से 15 किलोमीटर है। ये स्कूल से अपने खेतों में जाकर अपने मां-बाप की मदद करती हैं। चार बजे ये लड़कियां साईकिल लेकर खेल के मैदान में पहुंच जाती हैं और दो घंटे रोजाना अभ्यास करती है। पूरी तरह ग्रामीण परिवेश में रहने वाले ये लड़कियां अपनी जिद के पक्की हैं। इन लड़कियों ने फुटबॉल खेलने की धुन में अपने बाल तक कटवा डाले। 
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