कहते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। इसका जीता जागता उदाहरण पेश किया है आदित्य ने। जाखणीधार ब्लाक के ढुंगमंदार पट्टी के दूरस्थ गांव सेमा के आदित्य नौटियाल ने दिव्यांगता को मात देते हुए जेईई की परीक्षा देश में 95 रैंक और उत्तराखंड में दूसरा स्थान हासिल का गौरव बढ़ाया है।
सेमा गांव के भगवती प्रसाद नौटियाल के बेटे आदित्य नौटियाल का पैर वर्ष 2006 में बस के नीचे आ गया था, जिससे उसका एक पैर कमजोर हो गया। आदित्य भले ही पांव से कमजोर हो गया था, लेकिन उसने मन से हार नहीं मानी और कुछ बेहतर करने की ठानी।