Used Car Buying Tips: अक्सर लोग मानते हैं कि पुरानी कार खरीदने की सबसे बड़ी चुनौती सही कार चुनना होती है लेकिन असली परीक्षा कार घर लाने के बाद शुरू होती है। शोरूम में कुछ मिनट की टेस्ट ड्राइव से कार की असली हालत सामने नहीं आती। रोजमर्रा की ड्राइव, ट्रैफिक और लंबी यात्राओं में ही यह साफ होता है कि कार आपकी जरूरतों पर खरी उतरती है या नहीं।
हम में से ज्यादातर लोगों को लगता है कि पुरानी कार खरीदने में सबसे मुश्किल काम एक अच्छी कार ढूंढना है। लोगों को लगता है कि एक बार पैसे दे दिए और कार घर आ गई तो काम खत्म हो गया। पुरानी कार बेचने वाली कंपनियां भी अब तक यही सोचती आई हैं इसलिए वे सारा ध्यान कार दिखाने, उसकी जांच करने और डिलीवरी देने पर ही लगाती हैं। बेशक ये बातें जरूरी हैं लेकिन सच तो यह है कि ग्राहक का असली भरोसा कार खरीदने से नहीं बल्कि उसे चलाने के अनुभव से बनता है। असली कहानी तो कार घर लाने के बाद शुरू होती है।
कार की असली पहचान शोरूम में नहीं बल्कि सड़क पर होती है। जब आप उसे रोज ऑफिस ले जाते हैं, बाजार की भीड़-भाड़ में चलाते हैं या ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर लंबी ट्रिप पर निकलते हैं तब उसकी असली कंडीशन समझ आती है। सिर्फ 5-10 मिनट की टेस्ट ड्राइव से कार का पूरा हाल नहीं जाना जा सकता। यही कारण है कि कार खरीदने के बाद के पहले 30 दिन सबसे खास होते हैं। पुरानी कार के साथ नई जैसी गारंटी नहीं होती, थोड़ा रिस्क रहता ही है। हो सकता है कि दिखने में एक जैसी दो कारें चलाने में जमीन-आसमान का फर्क दिखाएं। कोई भी मैकेनिक चाहे कितनी भी जांच कर ले, वह पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि वह कार आपकी रोजमर्रा की जरूरतों पर पूरी तरह फिट बैठेगी या नहीं।
कार घर आने के बाद के शुरुआती कुछ दिन खरीदार के लिए उलझनों भरे होते हैं। उसके मन में अक्सर यह सवाल घूमता है कि क्या यह कार रोज के सफर में आरामदायक रहेगी और क्या इसमें उसका पूरा परिवार सही से आ पाएगा? अगर कार में कोई छोटी-सी भी गड़बड़ दिखती है तो वह डर जाता है कि कहीं यह कोई बड़ी समस्या तो नहीं और अब इसकी मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा। सबसे ज्यादा चिंता इसी बात की होती है कि कहीं वह गलत कार लेकर फंस तो नहीं गया और क्या अब इसे बदलने का कोई रास्ता बचा है? खासकर पहली बार पुरानी कार खरीदने वाले लोग छोटी-सी खराबी से भी बहुत जल्दी घबरा जाते हैं। ऐसे में अगर कार बेचने वाली कंपनी कार वापस करने का एक साफ-सुथरा विकल्प देती है तो ग्राहक का सारा तनाव खत्म हो जाता है। उसे यह तसल्ली रहती है कि वह कुछ दिन कार को अपनी जरूरतों के हिसाब से आजमा सकता है और फिर बिना किसी दबाव के आराम से अपना फैसला ले सकता है।
ग्राहक कार खराब होने से उतना नहीं डरते, जितना उस वक्त होने वाली माथापच्ची और उलझन से डरते हैं। उनके मन में बस यही सवाल रहते हैं कि अगर कोई दिक्कत आई तो उसे ठीक कराने की जिम्मेदारी किसकी होगी, इसमें कितना समय लगेगा और सबसे बड़ी बात कि खर्चा किसकी जेब से जाएगा? इन बातों से यह साफ है कि पुरानी कार बेचने वाली कंपनियों को सिर्फ कार बेचकर पल्ला नहीं झाड़ लेना चाहिए बल्कि अगले 30 दिनों तक ग्राहक का पूरा साथ देना चाहिए। असल में खरीदार को बस दो ही चीजें चाहिए: पहली, कार को आजमाने की पूरी छूट ताकि वह देख सके कि कार उसके काम की है भी या नहीं। और दूसरी, अचानक से कार में आने वाली खराबी से सुरक्षा दे। ये मुश्किलें सिर्फ फोन पर बात करने या सामान्य कस्टमर केयर से हल नहीं होतीं। इसके लिए दो ठोस कदम उठाने जरूरी हैं- पहला, 30 दिन तक कार वापस करने की सुविधा देना ताकि ग्राहक उसे तसल्ली से चलाकर देख सके और दूसरा, 30 दिन तक मुफ्त मरम्मत का पक्का भरोसा देना ताकि किसी भी अचानक आई खराबी को कंपनी अपनी जिम्मेदारी पर ठीक करे।
अनुभव यह बताता है कि अगर कार में पुराने मालिक के समय की कोई छिपी हुई खराबी है तो वह उसे रोजाना चलाने के पहले महीने में ही सामने आ जाती है। इसके बाद जो भी दिक्कतें आती हैं वे ज्यादातर इस बात पर निर्भर करती हैं कि नया मालिक कार को कैसे चला रहा है और उसकी देख-रेख कैसे कर रहा है। जब कार वापस करने का विकल्प मिलता है तो ग्राहक बेफिक्र होकर कार खरीदता है। साथ ही, इसका एक बड़ा फायदा यह भी है कि कार बेचने वाली कंपनियां ज्यादा सावधान हो जाती हैं। वे कार को बेचने से पहले बहुत बारीकी से जांच करती हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि अगर ग्राहक ने कार वापस कर दी तो कंपनी को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
कार में कोई छोटी-मोटी कमी आने पर उसे तुरंत लौटा देना हमेशा सही रास्ता नहीं होता क्योंकि कई चीजें बहुत आसानी से ठीक की जा सकती हैं। 'रिपेयर एश्योरेंस' का सीधा सा मतलब यह है कि अगर शुरुआती दिनों में कोई दिक्कत आए तो उसे ठीक कराने का आर्थिक बोझ ग्राहक की जेब पर न पड़े। यह लंबी अवधि वाली वारंटी से थोड़ा अलग है, इसका असली काम बस आपको उन 'शुरुआती झटकों' या अचानक आने वाली छोटी-मोटी दिक्कतों के खर्च से बचाना है।
पुरानी कार खरीदते समय सिर्फ कम कीमत के लालच में न फंसें। यह जरूर चेक करें कि कार घर लाने के बाद पहले 30 दिनों के लिए वह कंपनी आपको क्या सुरक्षा दे रही है।