ग्रामीण इलाकों में बढ़ेगी मांग
भारत में टू-व्हीलर की 55 प्रतिशत से ज्यादा मांग ग्रामीण इलाकों से आती है, जो खेती पर निर्भर करते हैं। जब मॉनसून अच्छा होता है, तो खेती का उत्पादन बढ़ता है और ग्रामीण इलाकों की आमदनी में इजाफा होता है। इससे विवेकाधीन खर्च यानी जरूरी चीजों के अलावा भी खरीदारी होती है, जिसमें टू-व्हीलर खरीदना भी शामिल है।
कंपनियों ने ली राहत की सांस
आईएमडी के इस सकारात्मक अनुमान के बाद टू-व्हीलर कंपनियों के बीच काफी राहत महसूस की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक टू-व्हीलर कंपनी के वरिष्ठ बिक्री अधिकारी ने कहा, "2023 में असल बारिश 96 प्रतिशत रही थी, लेकिन जो मुख्य क्षेत्र है जहां बारिश पर खेती ज्यादा निर्भर करती है, वहां 101 प्रतिशत बारिश हुई थी। उस साल टू-व्हीलर की बिक्री में 13 प्रतिशत की बढ़त हुई थी। पिछले साल भी ज्यादा बारिश हुई और बिक्री 9 प्रतिशत बढ़ी। तो साफ है कि अच्छी बारिश सीधे तौर पर टू-व्हीलर बिक्री को बढ़ावा देती है।"
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शहरी इलाकों में अब भी सुस्ती
बीते कुछ समय से शहरी इलाकों में टू-व्हीलर की मांग कमजोर बनी हुई है। इसकी वजह महंगाई, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और लोगों का रुझान प्रीमियम या इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर बढ़ना है।
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च के अनुसार, "अगर फसल अच्छी होगी और ग्रामीण इलाकों में नकदी का प्रवाह बेहतर रहेगा, तो वहां के लोग किफायती टू-व्हीलर जैसे कि एंट्री-लेवल मोटरसाइकिल और स्कूटर खरीदने में रुचि दिखाएंगे। इससे शहरी इलाकों की कमजोर मांग का कुछ हद तक संतुलन बन सकता है, खासकर उन कंपनियों के लिए जिनकी ग्रामीण पकड़ मजबूत है।"
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हाल के महीनों में चुनौतियां भी रही हैं
हालांकि बीते चार महीनों का समय टू-व्हीलर सेक्टर के लिए आसान नहीं रहा। दिसंबर से अब तक बिक्री में 5 प्रतिशत की गिरावट आई है, खासकर मोटरसाइकिल श्रेणी में। इसकी वजह रही खराब खरीदार भावनाएं और वाहन लोन पर ब्याज दरों का ऊंचा स्तर। मांग में इस गिरावट की वजह से डीलरों के पास इन्वेंटरी भी बढ़ गई है।
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