सरकारों और अधिकारियों के बढ़ते दबाव के साथ, वाहन निर्माता स्थायी तरीकों का पता लगाने के लिए नए तरीकों की खोज करने के लिए नए-नए आइडिया खोज रहे हैं। इसी रणनीति के तहत, होंडा, टोयोटा और निसान जैसी ऑटो कंपनियों ने अपने नए वाहनों में रीसाइकिल्ड प्लास्टिक का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। निक्केई ने बताया है कि इन दोनों जापानी ऑटो दिग्गजों ने पुराने वाहनों से इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक को हासिल करने के लिए एक सप्लाई चेन बनाने का फैसला किया है। जिसका उपयोग नए मॉडलों में किया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कदम अपेक्षित नए यूरोपीय नियमों का पालन करने के लिए उठाया गया है।
होंडा कथित तौर पर रीसाइकिल्ड प्लास्टिक के लिए एक सप्लाई चेन बनाने के लिए रसायन निर्माताओं और रीसाइक्लिंग कंपनियों के साथ साझेदारी करने का लक्ष्य रखता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि योजनाओं में नई कारों में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के टाइप में लगभग 60 प्रतिशत से घटाकर छह या सात प्रतिशत करने का लक्ष्य है। जिससे रीसाइक्लिंग स्टेशनों पर छंटाई प्रक्रिया आसान हो जाती है। संयोग से, होंडा की पहली बड़े पैमाने पर उत्पादित इलेक्ट्रिक वाहन, होंडा ई, में लगभग 25 विभिन्न तरह के प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया था।
निसान और उसके सहयोगी रेनो भी स्क्रैप किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों से प्लास्टिक को रीसाइकल करने की पहल शुरू करने की योजना बना रहे हैं। जिसका इस्तेमाल यूरोप में असेंबल किए जाने वाले नए मॉडलों में किया जाएगा। निसान कथित तौर पर एक रेनो रीसाइक्लिंग यूनिट में निवेश करने पर विचार कर रहा है। जिसमें निवेश के आकार जैसे डिटेल्स को बाद में तय किया जाना है।
एक अन्य जापानी ऑटो निर्माता टोयोटा ने 2030 तक जापान और यूरोप में बने अपने नए वाहनों में इस्तेमाल होने वाले कुल प्लास्टिक के 30 प्रतिशत या उससे ज्यादा हिस्से को रीसाइकिल्ड प्लास्टिक से बनाने का लक्ष्य रखा है। टोयोटा की लैंड क्रूजर 250 सीरीज की एसयूवी में उस ऑटोमेकर द्वारा इन-हाउस एकत्रित प्लास्टिक की बोतलों से बने कपड़े वाली सीटें हैं। यूरोप में बेची जाने वाली टोयोटा सी-एचआर छोटी एसयूवी के लिए, कंपनी ने इसके पिछले मॉडल की तुलना में रीसाइकिल्ड प्लास्टिक के इस्तेमाल को लगभग दोगुना कर दिया।
यूरोप में नियमों के कड़े होने की आशंका के बीच, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसे लग्जरी कार निर्माता भी अपने वाहनों में ज्यादा रीसाइकिल्ड प्लास्टिक का इस्तेमाल करने की ओर बढ़ रहे हैं। भारत में भी, वाहन स्क्रैपेज नीति का मकसद वाहन निर्माताओं को रीसाइकिल्ड प्लास्टिक और अन्य पार्ट्स का इस्तेमाल करने की सुविधा प्रदान करना है। जिन्हें रीसाइकल किया जा सकता है और नए वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
कारों में प्लास्टिक के इस्तेमाल के लिए ईयू ने कड़े किए मानक
यूरोपीय आयोग (ईसी) ने 2023 में एक नए नियम का प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत एक नए वाहन के कुल प्लास्टिक पार्ट्स में से कम से कम 25 प्रतिशत रीसाइकिल्ड प्लास्टिक होना चाहिए। इस नियम को जल्द से जल्द 2031 तक पूरी तरह लागू किया जाएगा। इस नियम का पालन न करने पर नए वाहनों को यूरोपीय संघ (ईयू) बाजार में बिक्री से रोक दिया जाएगा।
प्लास्टिक ऑटोमोबाइल उत्पादन में एक जरूरी सामग्री है। इस सामग्री का बड़े पैमाने पर बंपर, डैशबोर्ड जैसे इंटरनल कंपोनेट्स और अन्य पार्ट्स में भी इस्तेमाल किया जाता है। जबकि वाहनों में इस्तेमाल होने वाले नए प्लास्टिक से ऑटोमेकर्स के वित्तीय बोझ में कमी आती है। लेकिन इससे पर्यावरण में प्रदूषकों का उत्सर्जन बढ़ जाता है। इसे कम करने के प्रयास में, दुनिया भर की सरकारें और अधिकारी ऑटो कंपनियों पर रीसाइकिल्ड प्लास्टिक का इस्तेमाल करने के लिए कड़ा दबाव डाल रहे हैं। जिससे पर्यावरण पर बोझ कम होगा। हालांकि, इससे ऑटोमेकर्स की निर्माण लागत में बढ़ोतरी होगी।
उच्च लागत रीसाइकिल्ड प्लास्टिक ऑटो पार्ट्स के व्यापक रूप से अपनाने में एक बाधा रही है। सामान्य तौर पर, रीसाइकिल्ड प्लास्टिक पारंपरिक प्लास्टिक की लागत से तीन गुना तक ज्यादा महंगा कहा जाता है। इसलिए, रीसाइकिल्ड प्लास्टिक के उपयोग में तेज बढ़ोतरी से ऑटोमेकर्स की कमाई पर असर पड़ सकता है।