भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में मर्सिडीज-बेंज से खरीदी गई खराब लग्जरी कारों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के फैसलों को बरकरार रखा है। ये फैसले भारत में उपभोक्ता अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत के रूप में सामने आए हैं। जिससे यह बात साफ हो गई है कि उच्च-श्रेणी के कार निर्माता भी उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का पालन करने से मुक्त नहीं हैं।
खराब हीटिंग सिस्टम और एयरबैग खुलने की समस्याएं आईं सामने
एक्सप्रेस ड्राइव की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले मामले में, एनसीडीआरसी ने उस उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसे अपनी मर्सिडीज-बेंज कार के हीटिंग सिस्टम में लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अदालत ने मर्सिडीज-बेंज को खराब हीटिंग सिस्टम के कारण हुई असुविधा और मानसिक परेशानी के लिए उपभोक्ता को मुआवजा देने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इस फैसले को बरकरार रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि लग्जरी कार खरीदने से उपभोक्ता का यह अधिकार खत्म नहीं हो जाता है कि वह एक काम करने वाले उत्पाद की अपेक्षा कर सके।
Mercedes-Benz Car
- फोटो : Mercedes-Benz
दूसरे मामले में एक और गंभीर मुद्दा सामने आया, जहां एक दुर्घटना के दौरान मर्सिडीज-बेंज कार में लगे एयरबैग नहीं खुल पाए। एनसीडीआरसी ने फैसला सुनाया कि मर्सिडीज-बेंज ने उपभोक्ता को उन परिस्थितियों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी थी जिनमें एयरबैग खुलते हैं। आयोग ने तर्क दिया कि पारदर्शिता की इस कमी ने उपभोक्ता को खतरे में डाल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीडीआरसी के तर्क से सहमति जताई और उपभोक्ता को दिए गए मुआवजे को बरकरार रखा।
एनसीडीआरसी और सुप्रीम कोर्ट के ये फैसले भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक सकारात्मक विकास हैं। वे एक मजबूत मिसाल कायम करते हैं कि लग्जरी कार निर्माता किसी भी अन्य कार निर्माता के समान ही उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के अधीन हैं। जो उपभोक्ता लग्जरी कार खरीदते हैं, उन्हें यह उम्मीद करने का अधिकार है कि उन्हें एक उच्च-गुणवत्ता वाला उत्पाद मिलेगा। जो सुरक्षा मानकों को पूरा करता है और कंपनी के विज्ञापन के मुताबिक काम करता है। अगर कोई लग्जरी कार इन अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती है, तो अब उपभोक्ताओं के पास नुकसान या खराबी के लिए मुआवजा लेने के लिए कानूनी सहारा लेने का एक मजबूत रास्ता मौजूद है।
अदालत ने कहा, "लोग महंगी लग्जरी कारें असुविधा झेलने के लिए नहीं खरीदते हैं, खासकर तब जब वे आपूर्तिकर्ता पर पूरा भरोसा रखते हुए वाहन खरीदते हैं, जो ब्रोशर या विज्ञापनों में ऐसी कारों को दुनिया की सबसे बेहतरीन और सुरक्षित ऑटोमोबाइल के रूप में पेश और प्रचारित करता है।"
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये मामले यह सुझाव नहीं देते हैं कि लग्जरी कार निर्माता के खिलाफ हर शिकायत कामयाब होगी। हालांकि, वे यह साबित करते हैं कि उपभोक्ताओं के अधिकार हैं। और यदि उनका मानना है कि किसी लग्जरी कार निर्माता ने उन्हें खराब उत्पाद बेचा है, तो वे कानूनी सहारा ले सकते हैं। यह उपभोक्ताओं को लग्जरी कार डीलरशिप और निर्माताओं के साथ व्यवहार करते समय ज्यादा मुखर होने और उन्हें अपने उत्पादों में किसी भी कमी के लिए जवाबदेह ठहराने का अधिकार प्रदान कर सकता है।
कुल मिलाकर, इन दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले भारत में उपभोक्ता अधिकारों को मजबूती देने वाले हैं। वे साफ करते हैं कि लग्जरी कार निर्माता कानून से ऊपर नहीं हैं। और उपभोक्ताओं को कार की कीमत से इतर, एक अच्छी तरह से काम करने वाले और सुरक्षित उत्पाद की उम्मीद करने का अधिकार है।