वैश्विक कंप्यूटर चिप की कमी कार निर्माताओं को प्रभावित कर रही है। ऐसे में एक रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि हाइब्रिड कारें पारंपरिक ईंधन से चलने वाले मॉडल की तुलना में सप्लाई चेन के मुद्दों के प्रति दोगुनी संवेदनशील हैं।
जर्नल एनवायर्नमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित नतीजों से पता चला है कि सेल्फ-चार्जिंग हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों में कच्चे माल की लागत का जोखिम दोगुना है। जो पारंपरिक मॉडलों की तुलना में, 10 लाख सेडान और एसयूवी के बेड़े के लिए 1 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के बराबर है।
लागत जोखिमों में बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान बैटरी से संबंधित एलिमेंट्स थे, जैसे कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट और नियोडिमियम। हालांकि, अमेरिका में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रधान अनुसंधान वैज्ञानिक रैंडोल्फ किरचैन के अनुसार, हाइब्रिड वाहनों में निकास और ट्रांसमिशन सिस्टम में बदलाव से क्रमशः पैलेडियम और एल्यूमीनियम का प्रभाव कम हो गया।
इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए, शोधकर्ताओं ने चार सेडान और तीन स्पोर्ट यूटिलिटी वाहन (एसयूवी) सहित इलेक्ट्रिफिकेशन के विभिन्न स्तरों के साथ एक ही निर्माता के सात वाहनों को बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले 3,50,000 से ज्यादा पार्ट्स में कंपाउंड्स के बारे में जानकारी इकट्ठा की।
फिर, उन्होंने प्रत्येक कार प्रकार में मौजूद 76 रासायनिक तत्वों के साथ-साथ कुछ अन्य सामग्रियों की मात्रा की गणना की।