ब्लाइंड स्पॉट इतने खतरनाक क्यों होते हैं
ब्लाइंड स्पॉट आपकी गाड़ी के आसपास के ऐसे हिस्से होते हैं जिन्हें आपके शीशे पूरी तरह नहीं दिखा सकते। अक्सर इन्हीं जगहों में बाइक, साइकिल या दूसरी गाड़ियां छिप जाती हैं। लेन बदलते समय या हाइवे पर मर्ज करते वक्त इन्हें नजरअंदाज करना दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है।
ट्रैफिक भारी हो, वाहन तेज चल रहे हों या आपकी सीटिंग पोजिशन बदली हो, ब्लाइंड स्पॉट हर बार अलग तरह से सामने आ सकते हैं। यही बात उन्हें और जानलेवा बनाती है।
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ब्लाइंड स्पॉट सही तरीके से कैसे चेक करें
सही तरीका मिरर सेटिंग से शुरू होता है। अपने रियरव्यू और दोनों साइड मिरर ऐसे सेट करें कि उनकी दृश्य सीमा आपस में दोहराए नहीं, बल्कि एक-दूसरे को पूरा करे। इससे ब्लाइंड स्पॉट छोटे होंगे, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं।
सबसे जरूरी कदम है लेन बदलने या मोड़ लेने से पहले कंधे के ऊपर से जल्दी से सिर घुमाकर पीछे देखना। यह छोटा-सा कदम उन गाड़ियों को दिखा देता है जो मिरर में नहीं दिख पातीं।
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ब्लाइंड स्पॉट से बचने के अन्य महत्वपूर्ण तरीके
टर्न इंडिकेटर समय पर चालू करना बेहद जरूरी है। इससे दूसरे ड्राइवर आपकी मंशा समझ पाते हैं और टक्कर का खतरा घटता है। तेजी से ओवरटेक करते वाहन, भारी ट्रक इन सभी के ब्लाइंड स्पॉट अधिक होते हैं, इसलिए इनके पास विशेष सतर्कता जरूरी है।
अगर आपकी कार में ब्लाइंड-स्पॉट मॉनिटरिंग सिस्टम या सेंसर हैं, तो उनका इस्तेमाल करें। लेकिन याद रखें, टेक्नोलॉजी कभी भी कंधे के ऊपर से किए गए रियल चेक की जगह नहीं ले सकती।
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दूसरों के ब्लाइंड स्पॉट से दूर रहना भी जरूरी
सिर्फ अपना ब्लाइंड स्पॉट चेक करना ही काफी नहीं है। आपकी सुरक्षा तभी पूरी है जब आप दूसरों के ब्लाइंड स्पॉट में फंसे न रहें। अगर ऐसा हो जाए, तो थोड़ी स्पीड कम या ज्यादा करके खुद को उनकी दृश्य सीमा में लाएं।
कम रोशनी में हेडलाइट ऑन रखना और जरूरत पड़ने पर दूसरे ड्राइवर से आई-कॉन्टैक्ट बनाना भी आपकी उपस्थिति को स्पष्ट करता है।
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छोटी आदत, बड़ा सुरक्षा कवच
मिरर सेटिंग, कंधे के ऊपर से झट से चेक करना और ध्यानपूर्वक ड्राइविंग, ये सरल आदतें मिलकर सड़क पर कई खतरों को टाल सकती हैं। आपको प्रोफेशनल ड्राइवर बनने की जरूरत नहीं। बस थोड़ी जागरूकता और यह एक छोटा-सा ड्राइविंग सीक्रेट ही आपकी और दूसरों की जान बचा सकता है।
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