कैसे काम करेगी यह नई सुरक्षा प्रणाली
इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसे शुरू करने के लिए नई चेतावनी मशीनें या बोर्ड नहीं लगाने होंगे। पूरा सिस्टम जियो की मौजूदा 4G और 5G टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलेगा। यात्रियों को एसएमएस, व्हाट्सएप संदेश और हाई-प्रायोरिटी कॉल्स के जरिए समय से पहले अलर्ट मिलेंगे। ताकि वे खतरनाक हिस्सों में पहुंचने से पहले रफ्तार कम कर सकें और सावधानी बरतें।
इस सेवा को धीरे-धीरे एनएचएआई के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स राजमार्गयात्रा एप और नेशनल हाईवे इमरजेंसी नंबर 1033 के साथ भी जोड़ा जाएगा। जिससे उपयोगकर्ताओं को सुरक्षा और सहायता से जुड़े अपडेट एक ही चैनल पर उपलब्ध हो सकेंगे।
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पायलट प्रोजेक्ट और देशभर में विस्तार की तैयारी
इस ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम का पहला चरण कुछ चुने हुए एनएचएआई क्षेत्रीय कार्यालयों में पायलट रूप में शुरू होगा। इन ट्रायल्स से यह निर्धारित किया जाएगा कि कौन-से स्थान सबसे अधिक जोखिम वाले हैं और किस प्रकार के अलर्ट किस दूरी पर भेजने चाहिए। पहला चरण सफल होने के बाद इसे पूरे देश के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर विस्तार दिया जाएगा।
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एनएचएआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह पहल सभी मौजूदा नियमों और डेटा संरक्षण मानकों का पालन करेगी। आगे चलकर, अन्य टेलीकॉम कंपनियों को भी इस प्रणाली का हिस्सा बनाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को इसका लाभ मिल सके।
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तकनीक से बदलेगा सफर का अनुभव
एनएचएआई और जियो की यह संयुक्त पहल राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब बिना अतिरिक्त उपकरण लगाए, मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से ड्राइवरों तक रियल-टाइम खतरे की चेतावनियां पहुंचेंगी। जिससे दुर्घटनाओं में कमी आने और हाईवे यात्रा अधिक सुव्यवस्थित बनने की उम्मीद है।
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