तीन साल में कैसे बदले आंकड़े?
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, मोटर वाहन चोरी के मामलों में साल-दर-साल कमी आई है।
- वर्ष 2023 में 40,045 मामले
- वर्ष 2024 में 39,976 मामले
- वर्ष 2025 में 35,014 मामले
हालांकि, इन आंकड़ों का मतलब यह भी है कि हर दिन करीब 96 वाहन अब भी दिल्ली की सड़कों से गायब हो रहे हैं।
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कुल अपराधों में बड़ा हिस्सा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वाहन चोरी दिल्ली में होने वाले कुल अपराधों का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा बनी हुई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लगातार सख्ती और तकनीकी उपायों से मामलों में कमी आई है, लेकिन चोरी की कुल संख्या अब भी बड़ी चिंता का विषय है।
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NCR बना देश का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट
समस्या सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) पूरे देश में वाहन चोरी का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। पुलिस के मुताबिक, देशभर में दर्ज होने वाले 56 प्रतिशत से ज्यादा वाहन चोरी के मामले एनसीआर से जुड़े होते हैं।
इसके पीछे मुख्य वजहें हैं:
- राज्यों को जोड़ने वाला सघन सड़क नेटवर्क
- आसान अंतर-राज्यीय आवाजाही
- वाहनों की अत्यधिक संख्या
- अन्य संपत्ति अपराधों से कहीं ज्यादा वाहन चोरी
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आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि भले ही वाहन चोरी में गिरावट आई हो, लेकिन यह अब भी अन्य संपत्ति संबंधी अपराधों से कहीं ज्यादा है।
वर्ष 2025 में दिल्ली में:
- सेंधमारी के 6,617 मामले
- घरों से चोरी के 16,246 मामले
- जबकि वाहन चोरी के 35,014 मामले दर्ज किए गए
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चोरी में कमी की वजह क्या है?
पुलिस का कहना है कि वाहन चोरी में धीरे-धीरे आ रही गिरावट के पीछे कई कारण हैं:
- सीसीटीवी निगरानी का विस्तार
- ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) सिस्टम
- डेटा आधारित पुलिसिंग
- अंतर-राज्यीय समन्वय से संगठित गिरोहों पर कार्रवाई
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मांग अब भी बनी हुई है, इसलिए चुनौती जारी
हालांकि, पुलिस ने कई संगठित वाहन चोर गिरोहों का भंडाफोड़ किया है और चोरी हुए वाहनों की रिकवरी भी बेहतर हुई है। लेकिन अधिकारियों का मानना है कि चोरी के वाहनों और स्पेयर पार्ट्स की लगातार मांग इस अपराध को जिंदा रखे हुए है।
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राहत आंशिक, चुनौती बड़ी
दिल्ली में वाहन चोरी के मामलों में कमी राहत की बात है। लेकिन हर 15 मिनट में एक वाहन चोरी होना यह बताता है कि समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। पुलिस और प्रशासन के लिए यह चुनौती आने वाले समय में भी बड़ी बनी रहने वाली है।
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